11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 284

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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श्री एम.के. आचार्यः नहीं, इसका यह मतलब नहीं है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यही मेरा प्रश्न है?

श्री एम.के. आचार्यः कृपया इसे ठीक से पूछें?

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या किसी धार्मिक समारोह में पुजारी बनकर ऐसा आदमी कर्मकांड करा सकता है, जो ब्राह्मण नहीं है?

श्री एम.के. आचार्यः बहुत साधारण प्रश्न है। हर समुदाय, उप-समुदाय या वर्ग के पास अपने ही समाज का पुजारी होता है। कुछ समुदायों के यहां ब्राह्मण नहीं जाएगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अत्यन्त आदरपूर्वक, मैं आपको बता रहा हूं कि यह कथन सही नहीं है?

श्री एम.के. आचार्यः जहां तक मेरी जानकारी है, यह सच है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या श्री देशपांडे जानते हैं?

श्री देशपांडेः अब ऐसा ही है।

श्री एम.के. आचार्यः कुछ मामलों में ब्राह्मण पुजारी का काम नहीं करेगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः सभी धार्मिक मठाधीश ब्राह्मण हैं, क्या नहीं हैं?

श्री देशपांडेः नहीं। बंबई प्रेसिडेंसी में एक बहुत बड़ा मठ है, जिसके पास संपत्ति है। वहां पर एक भी ब्राह्मण नहीं है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुख्य रूप से कौन हैं?

श्री देशपांडेः कुछ ब्राह्मण हैं, कुछ दूसरे हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या यह सच नहीं है कि बंबई प्रेसिडेंसी में ब्राह्मण पुजारी हैं?

श्री देशपांडेः दूसरे भी हैं, लिंगायत हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं सवाल को उलझाना नहीं चाहता। मेरा सवाल है, लिंगायतों, जैनियों और बौद्धों से भिन्न (मैं विशुद्ध रूप से हिंदुओं की बात कर रहा हूं) क्या यह तथ्य नहीं है कि ये सब संस्थाएं ब्राह्मणों के नियंत्रण में हैं?

श्री देशपांडेः बंबई प्रेसिडेंसी में भी कुछ ऐसी संस्थाएं हैं, जो ब्राह्मणों के नियंत्रण में नहीं हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः बहुत कम?

श्री देशपांडेः हां, यह मानना होगा_ लेकिन यह नहीं कि ये सभी ब्राह्मणों की ही हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब यदि आपकी बात मान ली जाए कि इन मठाधीशों को पूर्व मंजूरी देने का अधिकार होना चाहिए, तो इसका अभिप्राय है कि हिंदू समाज की संपूर्ण नियति इन मठाधीश ब्राह्मणों के हाथ में होगी?

श्री एम.के. आचार्यः इसका यह अभिप्राय बिल्कुल भी नहीं है।