भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
वह सक्रिय है या नहीं।
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- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः लेकिन वह एक या दो साल चली थी?
श्री एम.के. आचार्यः वह सात या आठ वर्ष रही।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मद्रास प्रेसिडेंसी में भी ब्राह्मणों और गैर-ब्राह्मणों में बहुत गहरी दरार है?
श्री एम.के. आचार्यः इतनी गहरी नहीं कि जिसे धार्मिक प्रश्न कहा जा सके।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उनका अपना अलग संगठन है।
श्री एम.के. आचार्यः मेरी राय में अब जस्टिस पार्टी में ब्राह्मण भी शामिल किए जा रहे हैं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः लेकिन अभी तक वे शामिल नहीं किए गए?
श्री एम.के. आचार्यः अब वे ब्राह्मणों को ले रहे हैं। इसलिए वे बदल रहे हैं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या यह कहना सही होगा कि आप केवल ब्राह्मणों के विचारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
श्री एम.के. आचार्यः बिल्कुल गलत।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं, श्री देशपांडे। आपके ज्ञापन सं. 84 में पूना समझौते के बारे में कोई टिप्पणी दिखाई नहीं देती, क्या ऐसा है?
श्री एम.के. आचार्यः कोई भी नहीं है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या यह सच है?
श्री देशपांडेः यह सच है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः श्री आचार्य, आपके ज्ञापन सं. 65 में, पृष्ठ 3 पर इस पंक्ति के अलावा - ‘हम गुण-दोष के आधार पर पूना समझौते की निंदा करते हैं’, के अलावा और कोई उल्लेख नहीं है?
श्री एम.के. आचार्यः मेरे विचार में इतना काफी था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपकी यह प्रस्तुति बिल्कुल नया विचार है, है न?
श्री एम.के. आचार्यः हां, यह दूसरों के विचारों से भिन्न विचार है?
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः हिंदू महासभा का साक्ष्य दिए जाने के बाद?
श्री एम.के. आचार्यः नहीं, इससे बहुत पहले।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः श्री देशपांडे ने आपके ज्ञापन में इसे पहले क्यों नहीं रखा? यदि आपको इसकी निंदा करने की, अपने मुवक्किलों की आज्ञा थी, जैसा कि यहां कहा गया है?