272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री एम.के. आचार्यः मैं समझता हूं, श्री गांधी ने यही कहा है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः पंडित मालवीय का कहना है कि मामला ऐसा नहीं है कि पूना समझौता हिंदुओं पर ऐसा करने की कोई बाध्यता नहीं डालता और इसीलिए उनका कहना है कि वह पूना समझौते के भावार्थों से सहमत नहीं हैं। क्या यही बात नहीं है?
श्री एम.के. आचार्यः हां, यही है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह मामले के राजनीतिक पक्ष को नहीं छूता। श्री गांधी कहते हैं कि पूना समझौता हिंदुओं पर मंदिरों के द्वार खोलने की बाध्यता डालता है। पंडित मालवीय कहते हैं कि इसका ऐसा कोई भावार्थ नहीं है?
श्री एम.के. आचार्यः हां।
(15)
लेफटी. कर्नल सी.ई. बू्रस, सी.एस.आई., सी.आई.ई., सी.बी.ई., लेफटी. जनरल
माननीय जॉर्ज मैकमन, के.सी.बी., के.सी.बी.आई., डी.एस.ओ., श्री एफ.एफ.
लाअल, सी.आई.ई.ई., श्री वारिस अमीर अली, आई.सी.एस., श्री ओ.सी.जी.
हेयटर तथा माननीय न्यायमूर्ति श्री डब्ल्यू.ए. लेरोसिगनल
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽ जब आप जिला न्यायाधीश थे, क्या उस समय भारत में मंत्री भी होते थे।
लेफटी. कर्नल सी.ई. बू्रसः थे, लेकिन उनका मुझसे कोई सरोकार नहीं था, वे निर्वाचित मंत्री नहीं थे। किन्तु इस ज्ञापन में मैं भविष्य का उल्लेख कर रहा हूं, अब, जैसा कि मैं समझता हूं, प्रस्तावित संविधान...।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं समझा था कि आप अपने अनुभव से बोल रहे थे?
लेफटी. कर्नल सी.ई. बू्रसः क्या मैं स्पष्ट करूं? इसमें भविष्य का संकेत है। जब प्रस्ताव के अनुसार मंत्री निर्वाचित विधान-मंडलों के अधीन होंगे और निर्वाचित विधान-मंडलों के प्रति उत्तरदायी होंगे तथा अपनी कैबिनेट के साथ ही पदासीन रहेंगे या अपदस्थ हो जाएंगे।
माननीय हरी सिंह गौड़ः आपके शब्दों से भविष्यवाणी निकल रही है।
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विंग कमांडर ए.डब्ल्यू.एच. जेम्स, एम.पी., और डॉ. जे.एच. हटन,
सी.आई.ई., आई.सी.एस.
घ 29. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽऽः क्या वे जनजातीय विधि को अपनी परंपरागत विधि नहीं कह सकते?
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-घ, 16 अक्तूबर 1933, पृ. 2388-90