भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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विंग कमांडर ए.डब्ल्यू.एच. जेम्सः नहीं। यह उच्च न्यायालय द्वारा मान्य नहीं है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उच्च न्यायालय किसी भी रीति-रिवाज को मान्यता देगा?
विंग कमांडर ए.डब्ल्यू.एच. जेम्सः यह सिद्ध करना आवश्यक नहीं है कि वह हिंदू रीति-रिवाज है या मुसलमान रिवाज। उस अर्थ में यदि कोई विधि नहीं बनाई गई है, तो क्या कोई रिवाज या प्रथा लागू होगी? आम तौर पर यही होगा। मैं प्रत्यक्ष जानकारी के आधार पर नहीं बोल रहा हूं।
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घ 222. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः डॉ. हटन, मेजर एटली के प्रश्न के उत्तर में, मेरे विचार में, आपने कहा था कि आप चाहेंगे कि अपवर्जित क्षेत्र का प्रशासन प्रांतीय विषय की अपेक्षा केंद्रीय विषय हो?
डॉ. जे.एच. हटनः यह मेरी अपनी सोच है।
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घ 224. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब मैं कुछ अन्य विषयों पर आना चाहता हूं, जिनका जिक्र आपके ‘पेपर’ में किया गया है। मैं समझता हूं कि आपने यह आधार अपनाया है कि ये लोग किसी भी हालत में नए संविधान के कार्यक्षेत्र में न आएं?
डॉ. जे.एच. हटनः ऐसा ही है।
घ 225. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यही वह कल्पना और आधार है, जिस पर आप चल रहे हैं?
डॉ. जे.एच. हटनः मैंने यह माना कि कुछ परिस्थितियों में जहां वे दूसरी आबादियों में दूर-दूर तक छितरे हुए हैं, स्थिति भिन्न होगी।
घ 226. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किन्तु मुख्यतः, यही कल्पना, वह कल्पना है, जिस पर आप अग्रसर हैं?
डॉ. जे.एच. हटनः हां, मुख्यतः।
घ 227. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इन लोगों के लिए आपके सामने क्या आदर्श हैं। मैं अपना प्रश्न स्पष्ट कर दूं, ताकि आप बेहतर उत्तर दे सकें।
डॉ. जे.एच. हटनः किसी का भी न्यूनतम हस्तक्षेप।
घ 228. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे यह प्रश्न उस तरह पूछने दें, जैसा कि मैं इसे समझ पाया हूं। क्या आपका आदर्श है कि ये आदिम जन आदिम बने रहें और उनका शेष भारत के कार्यालयों से कोई वास्ता न हो, अथवा क्या आप चाहते हैं कि इन लोगों के भाग्य इस प्रकार विनियमित किए जाएं कि कालान्तर में वे मानव समाज के अलग-थलग अंग न रहें और शेष भारतीयों की भांति अपने देश के सार्वजनिक