274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कार्यों में भाग लें?
डॉ. जे.एच. हटनः मेरे विचार में यह दूसरी बात मेरा आदर्श है।
घ 229. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः कि वे स्थाई तौर पर आदिम न बने रहें?
डॉ. जे.एच. हटनः प्रश्न यह होगा कि यदि संभव हो तो अंततोगत्वा उन्हें अपने देश के जन-जीवन में भाग लेना चाहिए।
घ 230. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा भी यही कहना है?
डॉ. जे.एच. हटनः किन्तु संभव है कि कुछ मामलों में आप कभी भी उस आदर्श को प्राप्त न कर पाएं।
घ 231. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः सबसे पहले हम निश्चित करें कि वे आदर्श क्या हैं?
डॉ. जे.एच. हटनः हां।
घ 232. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं कोई धार्मिक प्रश्न शुरू नहीं कर रहा हूं कि उन्हें यह करना चाहिए या वह करना चाहिए?
डॉ. जे.एच. हटनः नहीं।
घ 233. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप जो कहना चाहते हैं, मैं समझता हूं कि आपका आदर्श है कि वे इस नागरिक समाज के अभिन्न अंग बन जाएं?
डॉ. जे.एच. हटनः हां।
घ 234. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः और वे अपनी आदिम अवस्था से बाहर आ जाएं?
डॉ. जे.एच. हटनः हां। मैं समझता हूं कि ऐसा करना आवश्यक है।
घ 235. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब हम आगे बढ़ें। यदि ऐसा विचार है, तो क्या यह वांछनीय नहीं है कि भारत के सभ्य लोगों और इन आदिवासियों के लिए भागीदारी एक सामान्य सिलसिला हो?
डॉ. जे.एच. हटनः अभी नहीं।
घ 236. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः ताकि जो विचार भारतीय समाज के सभ्य वर्ग के मस्तिष्क में उठ रहे हैं, वे धीरे-धीरे इन आदिवासियों में प्रवेश कर जाएं।
डॉ. जे.एच. हटनः मैं समझता हूं कि उनमें बिना किसी कठिनाई के विचार प्रवेश कर जाएंगे।
घ 237. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः कैसे?
डॉ. जे.एच. हटनः मुझे परेशानी यह है कि जब तक उन्हें पृथक नहीं किया जाएगा, उनके दो विभिन्न संपर्कों से नष्ट हो जाने की संभावना है। विश्व में अन्यत्र हर जगह यही हुआ है।