11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 292

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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घ 238. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे नहीं पता, किन्तु मैं आपके विचारार्थ यह निवेदन करना चाहता हूं कि जैसा कि आपने स्वीकार किया है, यदि यह आपका आदर्श है कि वे किसी दिन भारतीय समाज के अंग बन जाएंगे, तो क्या पृथक्करण और इतना पूर्ण और पक्का पृथक्करण जैसा आप चाहते हैं, उस आदर्श की प्राप्ति के लिए उचित मार्ग है?

डॉ. जे.एच. हटनः मेरे विचार में यही एकमात्र उपाय है।

घ 239. माननीय रेजिनाल्ड क्रेडोकः क्या मैं एक सवाल पूछ सकता हूं। उन आदिवासियों में से कुछ में विभिन्न शिक्षा संस्थाएं काम कर रही हैं, क्या ऐसी बात नहीं है?

डॉ. जे.एच. हटनः हां, अवश्य है. . .।

घ 240. माननीय रेजिनाल्ड क्रेडोकः क्या वे मुख्य रूप से मिशन स्कूल हैं अथवा कोई सरकारी स्कूल हैं?

डॉ. जे.एच. हटनः सरकार के अनेक स्कूल हैं।

घ 241. माननीय रेजिनाल्ड क्रेडोकः यह उन मुद्दों में से एक होगा, जिनको आप इन वर्गों के उत्थान के संबंध में इंगित करेंगे, क्या ऐसा नहीं करेंगे?

डॉ. जे. एच. हटनः मुझे करना चाहिए।

घ 242. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब मैं कुछ आगे बढ़ना चाहता हूं। आपके ‘पेपर’ से ज्ञात होता है (यदि मैं गलती करूं तो उसे सुधार दें) कि आप दो बातों से परेशान हैं। यदि आप समझते हैं कि शिक्षित या विकसित या सभ्य भारतीयों और आदिवासियों का एक संविधान में समावेश अथवा संपर्क मुझे इस शब्द के प्रयोग की इजाजत हो, तो से सबसे पहले ऐसा हो सकता है कि विकसित वर्गों अथवा यदि मैं कहूं कि भारतीय समाज के सभ्य वर्ग द्वारा उनका शोषण किया जाएगा?

डॉ. जे.एच. हटनः हां।

घ 243. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः दूसरे, मैं मानता हूं कि मेरे द्वारा इस प्रकार दिया सारांश सही है कि आप इस बात से भयभीत हैं कि नई परिषद में उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाएगा।

डॉ. जे.एच. हटनः हां।

घ 244. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपसे एक प्रश्न पूछूं। मैं उनकी भूमि का मामला लूंगा। क्या यह सच नहीं है कि यह प्रश्न अर्थात् जहां तक संभव हो आदिवासियों के हाथ में जमीन रखने का प्रश्न है, ताकि वे भूमिहीन मजदूरों के वर्ग में न आ जाएं, एक ऐसी समस्या है, जो भारत में अनेक कृषि वर्गों के सामने है और यह कि उनकी सुरक्षा के लिए भी बंबई में डंकन एग्रीकल्चरल रिलीफ एक्ट और पंजाब में एलिएनेशन ऑफ लैंड एक्ट जैसे अधिनियम तथा अन्य अनेक कानून पारित करना आवश्यक हो गया था?