276 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. जे.एच. हटनः मैं जानता हूं कि ऐसे अधिनियम पारित हो गए हैं?
घ 245. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा सुझाव है कि यदि इन आदिवासियों को उसी संविधान के अंतर्गत लाया जाए, जिसमें शेष भारत के लोग हों, तो वे साहूकारों को बाहर रखने की अपनी मांग में बिल्कुल अकेले नहीं रहेंगे और चाहेंगे कि भूमि उन्हीं लोगों के हाथ में रहे, जो उस पर खेती करते हैं और भी अनेक लोग होंगे, जिनकी विधान-मंडल में उसी प्रकार की मांग होगी। मैं जो मुद्दा पेश करना चाहता हूं, वह यह है कि वे अलग-थलग नहीं होंगे?
डॉ. जे.एच. हटनः मुझे जो उत्तर देना था, उसका मुद्दा यह था कि हलवे का स्वाद तो खाकर ही पता चलता है और अनुभव से पता चलता है कि वे हमेशा अपनी भूमि से वंचित रखे गए हैं।
घ 246. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किन्तु, डॉ. हटन, क्या आप यह अंतर करने का कष्ट करेंगे कि विधान-मंडल, जो रचना उनकी आज है और जो कुछ समय पहले थी, वैसे ही विधान-मंडल होने नहीं जा रहे हैं, जैसे कि श्वेत-पत्र के अंतर्गत होने चाहिए?
घ 247. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपको कुछ प्रतिनिधित्व साधारण निर्वाचन-मंडल से लेना होगा, जो अपेक्षाकृत गरीब वर्गों के पक्ष में जाएगा। पिछले विधान-मंडलों का अनुभव इस प्रकार के मामले में सुरक्षित मार्गदर्शक नहीं हो सकता?
डॉ. जे.एच. हटनः मैं शीघ्र ही निरापद स्थिति में होऊंगा और उन्हें अलग रखूंगा।
घ 248. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे नहीं पता कि आप इस बात से इंकार करने को तैयार नहीं हैं कि विधान-मंडल में उनके बहुत से मित्र होंगे?
डॉ. जे.एच. हटनः मैं यह बात नहीं मानूंगा। मुझे सबसे पहले यह बात समझाई जाए कि उनके बहुत-से मित्र होंगे। वैसे ही हितों वाले दूसरे लोग हो सकते हैं, किन्तु उनमें व्यक्तिगत तौर पर बहुत कुछ समान नहीं होगा।
घ 249. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः हां, किन्तु जहां तक एक-सी स्थिति वाले वर्ग के संरक्षण के सामान्य प्रश्न का संबंध है, मेरा यही अभिप्राय है।
डॉ. जे.एच. हटनः मैं यह बात सोच सकता हूं कि सिद्धांत में मुसलमान किसान अपने लिए अधिकतम संरक्षण की मांग करेंगे और अपने पड़ोसियों के लिए अधिकतम असंरक्षण की।
घ 250. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आप समझते हैं कि विधान-मंडल कहेगा कि कुछ कानून, जो भारतीयों के हित में आवश्यक हैं, व्यापक नहीं किए गए हैं और उन कानूनों का संरक्षण आदिवासी वर्गों को मालूम नहीं है?
डॉ. जे.एच. हटनः नहीं, मैं नहीं समझता कि वे वहां तक जाएंगे।
घ 251. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः विभेद कैसे पैदा होगा?
डॉ. जे.एच. हटनः मेरे विचार में आदिवासी वर्गों को आवश्यक संरक्षण प्राप्त करने