भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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में बेहद कठिनाई होगी। दलित वर्गों के पास कोई गारन्टी नहीं है कि किसानों को नए संविधान के अंतर्गत आवश्यक संरक्षण प्राप्त होगा।
घ 252. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः बिल्कुल ठीक। मैं आपसे सहमत हूं। यह कोई संरक्षण नहीं दिया जा सकता है कि अन्य वर्ग संभवतः एकजुट नहीं हो जाएंगे और दूसरे कुछ अल्पसंख्यकों को संरक्षण दिए जाने से नहीं रोकेंगे। यह आशंका जायज है। किन्तु एक पक्ष की समस्त ताकतों की तथा दूसरे पक्ष की समस्त ताकतों की गणना की जाए, तो जो मुद्दा मैं आपके सामने रखना चाहता हूं, वह यह है कि यह आशंका है कि प्रांतीय परिषद में आदिवासी वर्गों के एक या दो अथवा कुछ प्रतिनिधि महसूस करेंगे कि वे दूसरे पक्ष की ताकतों द्वारा परास्त कर दिए जाएंगे, इस विश्लेषण में बिल्कुल भी न्यायोचित बातें नहीं हैं, जो मैं भावी विधान-मंडलों की रचनाओं के बारे में आपके सामने पेश कर रहा हूं, जिस रूप में ये श्वेत-पत्र के प्रस्तावों के तहत होंगे?
डॉ. जे.एच. हटनः मेरे विचार में, प्रजाति के अन्तर की दृष्टि से कुछ स्थानों पर हर हालत में ऐसा होना बिल्कुल न्यायोचित है।
घ 253. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः पुनः शिक्षा का प्रश्न लीजिए, मुझे बंबई प्रेसिडेंसी में इन आदिवासी लोगों के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी है। यहां पर पिछड़ा वर्ग है?
डॉ. जे.एच. हटनः हां, मैं जानता हूं।
घ 254. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः हम स्वयं उनसे बहुत अधिक अलग स्थिति में नहीं हैं?
डॉ. जे.एच. हटनः मैं जानता हूं।
घ 255. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः शिक्षा की दृष्टि से, वास्तव में, यह नहीं कहा जा सकता कि भारत में बहुत सारे लोगों को आदिवासियों या पिछड़े हुए लोगों की अपेक्षा शिक्षा की कम आवश्यकता है।
डॉ. जे.एच. हटनः आप नहीं कह सकते कि कितनी?
घ 256. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप नहीं कह सकते (उदाहरण के लिए दलित वर्गों को लीजिए) कि उनकी शैक्षिक आवश्यकता कम हैं?
डॉ. जे.एच. हटनः आप नहीं कह सकते कि यह कम थी।
घ 257. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः ऐसा कोई नहीं कह सकता?
डॉ. जे.एच. हटनः नहीं।
घ 258. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं बंबई में पिछड़े वर्ग के मंडल में रहा हूं, जो दलित वर्गों और इन आदिवासी लोगों का एक मिला-जुला मंडल है।
डॉ. जे.एच. हटनः हां, कुछ मामलों में आदिवासी लोग बहुत अधिक शिक्षित हैं।
घ 259. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसलिए मैं कहता हूं, विधान परिषद में उनकी