भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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घ 265. लॉर्ड यूसटेस परसीः मैंने छोटे-छोटे राज्य स्थापित करने के आपके प्रस्ताव का आशय यह समझा है कि जहां तक संभव हो यह काम केंद्र का ही हो?
डॉ. जे.एच. हटनः निश्चय ही मेरा आशय यही था कि जहां तक संभव हो केंद्र यह काम करे।
घ 266. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उस स्थिति में भी मैंने जो आलोचना की है, वह तब भी उतनी ही लागू होगी, जब यह विषय केंद्रीय बना दिया जाएगा, क्योंकि गवर्नर को प्रजा के प्रशासन के लिए आवश्यक धनराशि प्रमाणित करनी होगी और यदि केंद्रीय सरकार के मंत्री उस धनराशि को खर्च करने पर आपत्ति करेंगे, तो भी मतभेद तो होगा। यह केवल प्रांतीय क्षेत्र से केंद्रीय-क्षेत्र में हस्तांतरित हो जाएगी?
डॉ. जे.एच. हटनः मैं यह मानता हूं कि मंत्री का इसमें कोई दखल नहीं होगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किन्तु मेरा मुद्दा यह है कि मंत्री का दखल होगा, क्योंकि
खर्च के लिए अन्य विरोधी दावे भी होंगे और मंत्रालयों से यह आशा नहीं की जा सकती कि वे आदिवासियों में रुचि लें, जो विधान-मंडलों के अंग नहीं हैं?
डॉ. शफाअत अहमद खानः क्या विधान-मंडल में आदिवासी लोगों के प्रतिनिधि साधारणतः दलित वर्गों के लोगों से मिल नहीं जाएंगे?
घ 267. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे ऐसा लग रहा है और इसीलिए उनके बहुत सारे मित्र होंगे।
डॉ. जे.एच. हटनः मैं नहीं समझता कि उससे प्रतिनिधित्व में प्रभाव पड़ेगा।
घ 268. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि आपकी तरह मैं अपने आपको निराश महसूस करूं, तो मुझे तुरन्त यह कहना चाहिए, ‘मैं इस संविधान को बिल्कुल भी नहीं चाहता।’
डॉ. जे.एच. हटनः किन्तु आदिवासी जातियों के लिए मैं ऐसा नहीं मानता।
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घ 284. मेजर ऐटलीः मैं नहीं समझता कि साइमन कमीशन ने वनों के बारे में आपके दृष्टिकोण के अनुरूप भी कोई सिफारिश की थी?
डॉ. जे.एच. हटनः नहीं। मैंने अपवर्जित क्षेत्र के आर्थिक प्रशासन के लिए उसे एक सुझाव के रूप में प्रस्तुत किया था।
लॉर्ड यूसटेस परसीः कदाचित डॉ. हटन इस कठिनाई को सुलझाएंगे, क्योंकि मैं यह नहीं समझता कि पूरी तरह अपवर्जित क्षेत्र क्या है जिसमें प्रांतीय वन अधिकारी और प्रांतीय वन नीति प्रभावी रहती है।
घ 285. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरे विचार से क्षेत्र अपवर्जित नहीं है, लोग अपवर्जित हैं?