280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. जे.एच. हटनः नहीं, क्षेत्र अपवर्जित हैं, जैसा कि मैंने श्वेत-पत्र में पढ़ा है। क्या श्वेत-पत्र में पूरी तरह अपवर्जित क्षेत्र की कोई परिभाषा दी गई है?
(17)
हाउस ऑफ कॉमन्स के सांसद माननीय विंस्टन स्पेंसर चर्चिल, सी.एच.
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः श्री चर्चिल, क्या श्वेत-पत्र में डोमिनियन संविधान स्थापित करने का प्रस्ताव नहीं है?
माननीय विंस्टन चर्चिलः नहीं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसलिए मैं आपको तार्किक और तात्विक स्थिति से संबंधित किसी प्रश्न से परेशान नहीं करना चाहता कि क्या रस्मी कार्यकलाप के रूप में डोमिनियन स्तर और डोमिनियन संविधान के रूप में डोमिनियन स्तर में कोई अन्तर कर सकता है? जो अन्तर आप चाहते हैं, उसके बारे में कोई भी बात पूछकर मुद्दे को उलझाए बिना मैं स्वयं श्वेत-पत्र के बारे में एक या दो प्रश्न पूछना चाहता हूं, इसलिए क्या मैं आपका ध्यान उस बहस की ओर आकृष्ट कर सकता हूं, जो 1 दिसम्बर 1931 को संसद में हुई थी, जब प्रधानमंत्री ने यह संकल्प पेश किया था’ ‘सभा ने महामहिम की सरकार की भारतीय नीति का उल्लेख कमांड पेपर संख्या 3972 - भारतीय गोलमेज सम्मेलन में किया है, जिसे 1 दिसंबर 1931 को संसद में पेश किया गया था।’ वह पहला श्वेत-पत्र था, न कि समग्र योजना?
माननीय विंस्टन चर्चिलः आपका अभिप्राय प्रधानमंत्री के भाषण से है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः प्रधानमंत्री का भाषण?
माननीय विंस्टन चर्चिलः ठीक है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः श्वेत-पत्र में प्रतिबिम्बित संविधान में, जो सदन में पेश किया गया था, उसमें वह प्रस्ताव था, जो संयुक्त प्रवर समिति के सामने पेश किए गए श्वेत-पत्र में वर्णित है। विधि और व्यवस्था के अन्तरण के साथ प्रांतों में अस्थाई सरकारें बननी हैं और केंद्र में एक प्रकार का दोहरा शासन होना है, जिसमें प्रतिरक्षा और विदेशी संबंध आरक्षित विषय होंगे। क्या यह ठीक है?
माननीय विंस्टन चर्चिलः इस मुद्दे पर मैं आपको बीच में नहीं टोकूंगा।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसके बाद मैं अगला प्रश्न इस विषय में पूछना चाहता हूं। प्रधानमंत्री ने हाउस ऑफ कॉमन्स में इस प्रस्ताव को पेश करते हुए अपना उद्देश्य स्पष्ट कर दिया था। उनके शब्दों में, ‘जो वक्तव्य मैंने कल गोलमेज सम्मेलन के सामने पेश किया था, उसे केबिनेट का पूरा समर्थन प्राप्त है और अब हम उस वक्तव्य से सदन को अवगत कराकर सदन में उस पर मतदान कर अपनी सहमति उस नीति के प्रति व्यक्त करें। ‘हाउस ऑफ कॉमन्स में इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने का प्रधानमंत्री का यही उद्देश्य था। अब जैसा कि आप जानते हैं, आपने इस प्रस्ताव में इस आशय का एक