282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय विंस्टन चर्चिलः निस्संदेह, मेरे विचार में सरकार ने उस सुझाव पर उचित दृष्टिकोण नहीं अपनाया, यह दुर्भाग्यपूर्ण था। उस संशोधन को लिखित रूप से पाकर मुझे बहुत खुशी होती।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपने जो कुछ उस दिन कहा था, उसमें से एक और अंश उद्धृत करना चाहता हूं। उस दिन सरकार के लिए आपका दूसरा विकल्प था कि यदि आपका संशोधन स्वीकार किया जाता है, तो आप सरकार के पक्ष में मत देकर संतुष्ट हो जाएंगे बशर्ते कि प्रधानमंत्री की घोषणा के साथ विदेश मंत्री का भाषण भी हो, जो उसी दिन हाउस ऑफ कॉमन्स में दिया गया था?
माननीय विंस्टन चर्चिलः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा मुद्दा यह है कि यदि आपकी स्थिति ऐसी है कि आप उस बहस-विशेष पर सरकार के पक्ष में मत दे देते, बशर्ते कि प्रधानमंत्री की घोषणा के साथ हाउस ऑफ कॉमन्स में दिया गया विदेश मंत्री का भाषण भी दे दिया जाता, मैं आपकी बात से यह समझा हूं कि इस समिति के सामने जिस रूप में श्वेत-पत्र पेश किया गया है उसे पढ़कर विदेश मंत्री के भाषण और प्रधानमंत्री के वक्तव्य में अन्तर समझ में आता है, क्या आप समिति के सामने पेश किए गए श्वेत-पत्र और हाउस ऑफ कॉमन्स में विदेश मंत्री द्वारा की गई व्याख्या के रूप में प्रधानमंत्री की घोषणा के बीच जो अन्तर आप समझे हैं, हमें बता सकते हैं?
माननीय विंस्टन चर्चिलः ऐसे अन्तर की स्थिति में, जो दो पक्षों के बीच संसद में अथवा हाउस ऑफ कॉमन्स में बहस से उत्पन्न होती है, बाहर वालों के लिए यह समझना कठिन है कि अन्तर क्या था, जब तक कि वे उन सब परिस्थितियों को न समझ लें, जो हमारी बहस को प्रभावित करती है, किन्तु उस संशोधन में जिसे मैं पेश करना चाहता था और उस प्रस्ताव के बीच जिसे सरकार ने पारित कर लिया था, एक बहुत बड़ा और वास्तविक अन्तर था। यह बात निर्विवाद है। उनमें सुस्पष्ट अन्तर था। स्वभावतः हर पक्ष अपने मामले को इस ढंग से पेश करता है कि समर्थन से कम से कम विमुख रहना संभव हो, किन्तु अन्तर फिर भी है और बिल्कुल स्पष्ट है तथा मैं डॉ. अम्बेडकर से यह नहीं कहता कि हमारी संसदीय संस्थाओं के प्रति न्याय के हित में उन्हें यह याद रखना चाहिए कि हमारे यहां अब भी संसद में दो सदन हैं और यह कि हाउस ऑफ लॉर्ड्स की बहस हाउस ऑफ कॉमन्स की बहस के सन्दर्भ में पढ़ी जानी चाहिए।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा आपसे सादर निवेदन है कि मैं स्वयं आपकी स्थिति को समझना चाहता हूं, चाहे हाउस ऑफ लॉर्ड्स की या पार्टी के अन्य सदस्यों
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ग, 25 अक्तूबर 1933, पृ. 1833
ऽऽ वही, 15 अक्तूबर 1933, पृ. 1849
ऽऽऽ वही, 10 नवंबर 1933, पृ. 1996