भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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की स्थिति कुछ भी हो। आपने निश्चित रूप से कहा था कि आप सरकार के पक्ष में मत देंगे बशर्ते कि प्रधानमंत्री का वक्तव्य विदेश मंत्री के भाषण के साथ में पढ़ा जाए। मैं जो मुद्दा आपके सामने रखना चाहता हूं, वह यह है कि क्या आप संयुक्त संसदीय समिति के सामने पेश किए गए श्वेत-पत्र में और प्रधानमंत्री के उस वक्तव्य में जिसकी व्याख्या उस दिन विदेश मंत्री ने हाउस ऑफ कॉमन्स में की थी, कोई अन्तर समझते हैं? निस्संदेह, यदि अन्तर है तो आपके पास मतभेद का पर्याप्त आधार होगा।
माननीय विंस्टन चर्चिलः डॉ. अम्बेडकर! मैं आश्वासन दे सकता हूं कि मैं कभी भी इस पक्ष में नहीं था कि भारत के केंद्र में इस समय संघीय प्रणाली की व्यवस्था की जाए और न ही इस पक्ष में था कि प्रांतों को विधि और व्यवस्था के विषय सौंप दिए जाएं तथा इस विवाद में मैंने जो कुछ अभी कहा है, उसमें कुछ भी उसके खिलाफ नहीं है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे और सवाल नहीं पूछने।
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- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः अध्यक्ष महोदय! क्या मैं आपकी इजाजत से एक सवाल पूछ सकता हूं?
अध्यक्षः जैसी आपकी मर्जी।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः श्री चर्चिल, मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं। क्या आप उत्तरदायी सरकार और डोमिनियन में कोई अन्तर समझते हैं?
माननीय विंस्टन चर्चिलः हां, उत्तरदायी सरकार की अनेक व्याख्याएं हैं, जो हमने व्यवहार में देखी और जानी हैं। उत्तरदायी सरकार से गंभीर, वास्तविक, महत्त्वपूर्ण वे कृत्य हो सकते हैं, जो किसी प्रांतीय अथवा स्थानीय निकाय के विवेकाधिकार के लिए हस्तांतरित किए गए हैं अथवा इससे उत्तरदायी सरकार की विभिन्न अपेक्षाएं अभिप्रेत हो सकती हैं। जो डोमिनियनों और औपनिवेशिक कार्यालयों की भाषा में तकनीकी समझ रखते हों, जैसे विधान सभा के प्रति उत्तरदायी मंत्री आदि, किन्तु हमारी दूरस्थ डोमिनियन और साम्राज्य के इतिहास में संस्थाओं की सुनिश्चित रूप से बहुत सारी श्रेणियां हैं, जो ‘उत्तरदायी सरकार’ शब्द के अंतर्गत आ जाएंगी।
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- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽऽः क्या आप इस बात से सहमत हैं कि जन-साधारण को वयस्क मताधिकार दिया जाए?
माननीय विंस्टन चर्चिलः नहीं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्यों नहीं?
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ग, 13 नवंबर 1933, पृ. 2043