284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय विंस्टन चर्चिलः क्योंकि मैं समझता हूं कि ऐसा करना तनिक भी व्यावहारिक नहीं है।
(18)
एंग्लो-इंडियन एंड डोमिसाइल्ड यूरोपीयन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से
लेफिट. कर्नल हेनरी गिडने, एम.एल.ए., आई.एम.एस. (सेवा निवृत्त)
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽऽऽः आपके ज्ञापन से मैंने यह समझा कि आप इस बात के प्रति बहुत शंकालु हैं कि नए संविधान के अंतर्गत आपके समुदाय का क्या होगा। मैं मानता हूं कि ऐसी शंकाएं अन्य अनेक अल्पसंख्यकों को भी हैं। अतः मेरा प्रश्न है कि यदि संविधान में ऐसा उपबंध कर दिया जाए कि भावी भारत की केंद्रीय सरकार में कोई अधिकारी या कोई विभाग ऐसा होना चाहिए, जिसका कानूनी दायित्व भारत में विभिन्न समुदायों की नैतिक और भौतिक अवस्था के बारे में हर वर्ष एक रिपोर्ट संसद में पेश करना हो, तो क्या उस मत से जो आपका है, कोई प्रयोजन सिद्ध होगा? क्या आप समझते हैं कि संसद का ध्यान ऐसी किसी बात के प्रति आकृष्ट करने के लिए, जो विभिन्न प्रांतों के प्रशासन के दौरान आपके भौतिक हितों को प्रभावित करते हुए उत्पन्न हो, यह प्रस्ताव आपके समुदाय के लिए उपयोगी होगा?
माननीय हेनरी गिडनेः वह प्रस्ताव उस अंतिम सिद्धांत के रूप में मेरे पूर्ण अनुमोदन के अनुसार है कि अल्प-संख्यकों का संरक्षण कैसे होगा? किन्तु उसके प्रारंभिक कदम के रूप में अल्पसंख्यक, मेरे विनम्र विचार से तब तक संरक्षण की मांग कर सकते हैं? जब तक कोई भी हर वर्ष संसद के सदन में रिपोर्ट पेश नहीं करता, उन्हें व्यावहारिक संरक्षण चाहिए।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे अपनी बात स्पष्ट करने दें। मैं जो सुझाव दे रहा हूं, वह उसके स्थान पर नहीं है, जो आप कह रहे हैं, बल्कि वह उसका अनुपूरक हो सकता है।
माननीय हेनरी गिडनेः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आप मुझसे सहमत हैं कि सत्ता के संभावित दुरुपयोग को उजागर करने का यह मौका अथवा यह ढंग अपने आप में किसी संभावित दुरुपयोग पर नियंत्रण रखने का काम करेगा?
माननीय हेनरी गिडनेः मैं निश्चय ही समझता हूं कि यह ऐसी किसी भी बात को, जो समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हो, संसद के सदनों के सामने लाने का एक साधन होगा।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः केवल आपका ही नहीं, बल्कि अन्य अनेक का भी?