11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 307

290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

करता रहे, यदि श्वेत-पत्र के सुझाव को मान लिया जाए, तो यही स्थिति होगी कि दूसरे सदन का नामजद सदस्य मंत्री बनने का हकदार होगा। मंत्री परिषद की नियुक्ति के बारे में मैं आपका ध्यान प्रांतीय संविधान की उप-समिति की सिफारिशों की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं। उन्होंने कहा था, ‘उप-समिति की राय है कि उस कार्य के निर्वहन में गवर्नर को साधारणतः विधान-मंडल में बहुमत प्राप्त सदस्य को आमंत्रित करके उससे मंत्रियों के नाम सुझाने और अनुमोदन के लिए पेश करने के लिए कहना चाहिए।’

पैरा 67 में कहा गया है कि वह ‘निम्नलिखित रीति से अपने मंत्रियों का चुनाव करने के लिए भरसक प्रयास करेगा’ -- जिसे मैं प्रांतीय संविधान समिति की सिफारिश से पर्याप्त अलग हटना मानता हूं?

माननीय सेम्युअल होरः मैं नहीं समझता कि तनिक-सी भी अलग हटने वाली कोई बात है। समिति ने ‘साधारणतः’ कहा था और मैं कल्पना करता हूं कि साधारणतः यही होगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप यह नहीं समझते कि सामूहिक उत्तरदायित्व को निभाने के हित में सरकार पर यह बाध्यता लगाना आवश्यक होगा कि उसे मंत्री परिषद का निर्माण करने में एक विशिष्ट मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

माननीय सेम्युअल होरः गोलमेज समिति ने ऐसा नहीं सोचा था, जो डॉ. अम्बेडकर ने उद्धृत किया है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरे विचार में यही बात थी।

माननीय सेम्युअल होरः आपने अभी उनका एक उद्धरण पढ़ा है और कहा है कि उन्होंने ‘साधारणतः’ सोचा था।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अथवा उन्हें ऐसा करना चाहिए न कि ‘भरसक प्रयास’?

माननीय सेम्युअल होरः यह शब्दों का हेर-फेर है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अगला प्रश्न, जो में पूछना चाहता हूं, वह प्रस्ताव 104 के अंतर्गत मंत्रियों के अध्यादेश संबंधी अधिकार के बारे में है। मैं जो पूछना चाहता हूं, वह यह है कि संविधान के अंतर्गत ही इस प्रकार का उपबंध करना क्यों आवश्यक है? क्या प्रांतीय विधान-मंडल में किसी मंत्री परिषद के लिए उसी प्रकार विधान-मंडल द्वारा एक आपात अधिनियम पारित करना संभव नहीं होगा, जैसा उदाहरण के लिए इस देश में 1920 का अधिनियम है और अपनी शक्तियां विधान-मंडल द्वारा पारित अधिनियमों से प्राप्त करना संभव नहीं होगा? मैं प्रस्ताव संख्या 104 की बात कर रहा हूं। क्या प्रांतीय मंत्री परिषद के लिए प्रांतीय विधान-मंडल द्वारा ऐसा अधिनियम पारित करना संभव नहीं होगा, जो उन्हें एक खास आपात-काल में कार्य करने के आवश्यक

ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 18 जुलाई 1933, पृ. 784