भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
अधिकार देता हो?
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माननीय सेम्युअल होरः मुझे सोचना चाहिए था कि जब विधान-मंडल का सत्र न चल रहा हो, तो खासकर भारत जैसे देश में, प्रत्येक सरकार के पास आपात कार्रवाई करने की शक्ति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। भारत एक बहुत बड़ा देश है, जहां विधान-मंडल की बैठक आयोजित करने में कुछ समय लग सकता है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा सुझाव है कि प्रांतीय मंत्री परिषद प्रांतीय विधान-मंडल से ऐसा अधिनियम पारित करा सकती है, जिसमें आपात स्थितियों की परिभाषा दी जाए, जिनमें उनके द्वारा कार्रवाई करना अपेक्षित हो और विधान-मंडल उन्हें अधिकार दे सके। इसी प्रकार के उपबंध संविधान में ही करना क्यों आवश्यक है?
माननीय सेम्युअल होरः क्योंकि मैं यह एक अनिवार्य आवश्यकता मानता हूं, जो सरकार के पास होनी चाहिए और चूंकि हम संविधान के संपूर्ण क्षेत्र पर विचार कर रहे हैं, इसलिए इस प्रकार की शक्ति संविधान अधिनियम में शामिल की जानी चाहिए।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह एक ऐसी शक्ति है, जो एक उत्तरदायी मंत्री परिषद को दी जानी अपेक्षित है और सही यही होगा कि उत्तरदायी मंत्री परिषद को अपनी शक्तियां चाहे आपात स्थिति हो या नहीं विधान-मंडल से प्राप्त करनी चाहिए, जिसके प्रति वे उत्तरदायी हैं।
लॉर्ड यूसटेस परसीः क्या मैं डॉ. अम्बेडकर को याद दिलाऊं कि इस देश में 1922 के अधिनियम द्वारा इस शक्ति को केवल नियमित किया गया था, जिसका प्रयोग मंत्रीगण बिना विधान के बराबर करते थे। इस देश में हमेशा यह परिपाटी रही है कि परवर्ती संसदीय समर्थन के अधीन रहते हुए मंत्री परिषद आपात आदेश जारी कर सकती है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं केवल यही पूछ रहा हूं।
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- माननीय हुबर्ट कारऽः संख्या 44 गवर्नर जनरल को, ‘किसी भी स्थिति में जिसमें वह यह समझे कि पुनःस्थापन के लिए प्रस्तावित विधेयक, अथवा उसका कोई
खंड, अथवा पेश किया गया या प्रस्तावित विधेयक का कोई संशोधन भारत में शांति या सद्भाव के किसी गंभीर संकट को रोकने के उसके विशेष उत्तरदायित्व के निर्वहन को प्रभावित करेगा, यह निदेश देने का विशेषाधिकार प्रदान करता है कि उस विधेयक, खंड अथवा संशोधन पर और आगे कार्रवाई नहीं होगी।’ मैं समझता हूं कि यह उसी स्थिति में होगा, जब भारत में शांति या सद्भाव के उसके विशेष उत्तरदायित्व को खतरा हो। क्या उसके अन्य विशेष उत्तरदायित्वों को खतरा होने की स्थिति में उसके लिए ऐसी कोई शक्ति विद्यमान है?
माननीय सेम्युअल होरः नहीं, मेरे विचार में नहीं।
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 18 जुलाई 1933, पृ. 797-805