भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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माननीय सेम्युअल होरः सरकार ने गलत या सही रूप में अपने मूल ‘सांप्रदायिक पंचाट’ के पैरा 4 की शर्तों के अधीन ‘पूना समझौते’ को संबंधित पक्षकारों के मध्य एक अखिल भारतीय करार के रूप में स्वीकार कर लिया है, अर्थात् यह दलित वर्गों और अन्य हिंदुओं के मध्य एक करार है। प्रत्येक भारतीय सामान्य जन जानता है कि ‘पूना समझौता’ बातचीत में हुई प्रगति का परिणाम है और माना गया कि सभी प्रांत बद्ध पक्ष यह सुनिश्चित कराना चाहेंगे कि उनके विचारों की उपेक्षा न की जाए। संभवतः यह कहना महत्त्वपूर्ण रहेगा (मैं समिति का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं) कि इस ‘समझौते’ की घोषणा के काफी समय बाद तक बंगाल से किसी प्रकार का विरोध नहीं हुआ। वास्तव में विचार-विमर्श के दौरान हमें इस ‘समझौते’ के पक्ष में अनेक तार प्राप्त हुए और इन अनेक तारों में से एक भी तार ऐसा नहीं था, जिसमें इसके विरुद्ध कुछ कहा गया हो। मुझे तत्काल स्मरण हो आया कि इनमें से एक तार बंगाल के एक प्रतिष्ठित नागरिक रवीन्द्र नाथ ठाकुर का था। मुझे नहीं मालूम कि बंगाल में विरोध कब आरंभ हुआ और मैं नहीं बता सकता कि सरकार के समक्ष किसी प्रकार के अभ्यावेदन रखे गए और उनके द्वारा ‘पूना समझौता’ स्वीकार किए जाने के तीन माह उपरांत ऐसा कुछ हुआ। सरकार बंगाल के संबंध में ‘समझौते’ के गुणावगुण के बारे में कुछ कहना नहीं चाहती है। वास्तव में, सरकार बंगाल के बारे में संबंधित पक्षों में आपसी सहमति से किए गए किसी भी संशोधन को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। किंतु सरकार अपनी हैसियत में मूल ‘सांप्रदायिक पंचाट’ की शर्तों द्वारा इस उद्देश्य से किसी प्रकार की बातचीत में भाग लेने से स्वयं प्रतिबाधित है।
- श्री एम.आर. जयकरः माननीय रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने क्या तार भेजा था? क्या उन्होंने इस ‘समझौते’ का अनुमोदन किया है?
माननीय सेम्युअल होरः उन्होंने सरकार से ‘समझौते’ को स्वीकार करने का अनुरोध किया है।
माननीय तेज बहादुर सपू्रः माननीय सैम्युअल होर! क्या मैं आपको और समिति को इस विषय में एक और बात से अवगत करा सकता हूं? जिस समय इस संबंध में बातचीत चल रही थी, उस समय मैं और श्री जयकर दोनों लगभग चार-पांच दिन तक पूना में थे। मुझे कुछ-कुछ याद पड़ता है कि बंगाल के हिंदुओं से तार प्राप्त हुए थे। मुझे व्यक्तिगत रूप में दो-तीन बंगाली हिंदुओं से तार प्राप्त हुए। ये तार मेरे पास इस समय यहां नहीं हैं। और आगे मैं यह कहना चाहता हूं कि माननीय रवीन्द्र नाथ ठाकुर श्री गांधी से अनशन समाप्त करते समय या उसके कुछ समय बाद जेल में मिले थे। जहां तक मुझे याद है, इसमें सुधार किया जा सकता है।
माननीय हरी सिंह गौड़ः मुलाकात हुई थी।
माननीय तेज बहादुर सपू्रः एक समारोह आयोजित किया गया था। मैं समझौते पर हस्ताक्षर करने के तुरन्त बाद पूना से चल दिया था। यह सब मेरे चले जाने के बाद ही हुआ था। श्री जयकर वहां थे और वह इस बारे में बता सकेंगे।