11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 323

306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. माननीय एन.एन. सरकारः क्या माननीय सेम्युअल होर को मालूम है कि माननीय रवीन्द्र नाथ टैगोर ब्राह्मण हैं?

माननीय सेम्युअल होरः ऐसा ही है, यह मुझे माननीय नृपेन्द्र सरकार से ज्ञात हुआ है। फिर भी निर्विवाद तथ्य यह है कि कई सप्ताह हमें भारत से असंख्य तार और पत्र मिले थे जिनमें समझौते को स्वीकार करने का आग्रह किया गया था और उसके विरोध में एक भी पत्र नहीं मिला था।

  1. माननीय एन.एन. सरकारः मैं बहुत बारीकी में नहीं जाऊंगा, क्योंकि मैं इन्तजार कर रहा हूं कि इस मुद्दे पर साक्ष्य लिया जाए। लेकिन क्या आपने उन तारों की छानबीन की है? क्या वे सब कांग्रेस के लोगों की ओर से आए थे?

माननीय सेम्युअल होरः वे सब हिंदुओं की ओर से आए थे और मैं एक क्षण के लिए भी यह बात नहीं मानूंगा कि वे पूरी तरह कांग्रेसी हिंदुओं से आए थे।

  1. माननीय एन.एन. सरकारः जहां तक इस बात का संबंध है, उस समय या उसके आस-पास पर्याप्त विरोध नहीं किया गया था तथा कुछ लोगों से तार मिले थे। क्या मैं आपके सामने यह स्थिति रख सकता हूं कि जब महात्मा गांधी ने वह धमकी दी थी, उस समय हिंदुओं के एक विशाल वर्ग को हर तरह से नीचा दिखाने का ही सवाल नहीं था। क्या यह कहना सही नहीं होगा कि यही स्थिति महामहिम की सरकार की भी थी।

माननीय सेम्युअल होरः यह कभी भी हमारे दिमाग में नहीं आया।

  1. माननीय एन.एन. सरकारः मैं आपसे पूछना चाहता हूं, अगर आपको बात समझ में आ गई है। जब उन्होंने कहा था, ‘मैं आमरण अनशन करने जा रहा हूं, जब तक कि ब्रिटिश सरकार यह नहीं करती है’, आपने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 508 का उल्लेख करके नहीं कहा, ‘यह एक अपराध है, किन्तु हम आपको जेल से बाहर जाने देना चाहते हैं।’ क्या यह महामहिम की सरकार की भी समझ में, अध्यारोही बातों के कारण नहीं था, क्योंकि इस व्यक्ति को अनशन करने दिया गया, तो इसके भीषण परिणाम हो सकते हैं। अतः भारतीय दंड संहिता के अधीन, जो एक अपराध था, उसमें आपने मौन स्वीकृति ही नहीं दी, बल्कि आपकी यह प्रस्थापना थी कि जो आदमी दूसरे कारणों से जेल में रखा जाना चाहिए वह अब जेल से बाहर आना चाहिए। यह बातें मैं आपसे पूछ रहा हूं?

माननीय सेम्युअल होरः माननीय नृपेन्द्र सरकार निश्चित रहें कि हमने किसी भी तरह किसी भी प्रकार की धमकी अथवा किसी भी आपात-स्थिति में कार्रवाई नहीं की। हमने इस प्रश्न के जिस पहलू को देखा था, वह केवल यह था कि क्या किया गया समझौता ऐसा समझौता था, जैसा हमने सांप्रदायिक फैसले के अधीन परिकल्पित किया था। वह निर्णय समस्त उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर किया गया था। इसके बाद और कई सप्ताह तक हमें यह पूर्णतः सुनिश्चित प्रतीत होता था कि यह समझौता ऐसा ही है।

  1. माननीय एन.एन. सरकारः मेरे विचार में आपको ज्ञात है कि दिसंबर 1932