11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 324

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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में मैंने एक पत्र द्वारा प्रधानमंत्री को एक अभ्यावेदन भेजा था, जिसके साथ कई तार संलग्न थे, जो यहां बंगाल परिषद के सदस्यों से नंवबर में प्राप्त हुए थे?

माननीय सेम्युअल होरः मुझे ज्ञात है कि माननीय नृपेन्द्र सरकार ने शुरू से लेकर आखिर तक इस प्रश्न पर गहरी रुचि दिखाई है।

माननीय एन.एन. सरकारः मैंने वह पत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया था, जैसा कि परिषद के सदस्यों ने अनुरोध किया था, और आप देखेंगे कि इससे पहले मैंने बंगाल परिषद के 25 सदस्यों के विरोध का तार प्रधानमंत्री को भेजा था कि बंगाल का प्रतिनिधित्व नहीं हुआ है, आदि। वह डॉ. अम्बेडकर को दिखा दिया गया था, जिन्होंने यह पता लगाने के लिए बंबई एक तार भेजा था कि इस तार का क्या उत्तर है। मैंने इस तार को उन्हें दिखाना उचित समझा था, ताकि वे बंबई से अपना पक्ष-कथन प्राप्त कर सकें और यह वही उत्तर है, जो इन्हें मिला था।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः माननीय नृपेन्द्र सरकार, मुझे क्षमा करें, मैं आश्वासन देता हूं कि मैंने ऐसी कोई बात नहीं की। माननीय नृपेन्द्र सरकार ने कहा कि उन्होंने ऐसा तार मुझे दिखाया था और उसके बारे में बंबई से कुछ जानकारी लेने के लिए मुझसे कहा था। मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया।

माननीय एन.एन. सरकारः मेरे पास एक प्रति है, जो मुझे डॉ. अम्बेडकर ने दी थी और जो उत्तर इन्हें मिला था, मैं आपके सामने पढ़ूंगा।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह उत्तर नहीं है_ यह मुझे भेजा गया एक पृथक तार है।

माननीय एन.एन. सरकारः मुद्दा तार की विषय-वस्तु का है, जिसमें कहा गया है कि बंगाल के हिंदू बंबई आने में अपनी चूक के कारण इससे बाध्य हैं, अर्थात् यह इस आधार पर कहा गया था कि हम इसलिए बाध्य हैं, क्योंकि हमने समझौते में भाग नहीं लिया था। मेरे विचार में प्रधानमंत्री को जो तार भेजे गए थे, उनमें आपने यह अवश्य देखा होगा।

माननीय सेम्युअल होरः मेरे विचार में यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे तार केवल दिसंबर में भेजे गए और उस समय नहीं भेजे गए थे, जब बातचीत वास्तव में चल रही थी।

7501-2. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः नवंबर का तार दिसंबर में भेजा गया था और मैं उत्तर का इन्तजार कर रहा था। बंगाल परिषद की बैठक इन वार्ताओं के बाद पहली बार नवंबर में हुई थी। बैठक के तुरन्त बाद ही 25 सदस्यों ने अपना अभ्यावेदन तार द्व ारा प्रधानमंत्री को भेज दिया था। मैं आपको केवल यह बताना चाहता था कि जो कुछ भी कहा गया हो, मामला यह है कि बंगाल ने चूक की है। उस तार में भी बंगाल का मामला कभी सिद्ध नहीं किया गया है। अगला मामला जिसकी ओर मैं आपका ध्यान आकृष्ट करता हूं, बहुत छोटा-सा है। क्या माननीय सेम्युअल होर इस राय से सहमत हैं कि जो स्थिति पूना समझौते और सांप्रदायिक निर्णय के परिणामस्वरूप पैदा हुई है, उसके बंगाल में बहुत भयंकर और गंभीर परिणाम हो सकते हैं?