308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय सेम्युअल होरः नहीं, मैं ऐसा नहीं समझता।
माननीय एन.एन. सरकारः मैं समझता हूं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आपकी राय है कि यदि मुसलमानों के स्थानों की बहुत बड़ी संख्या 119 में से 10 या 12 स्थान घटा दिए जाएं, तो इसके बंगाल में भयंकर परिणाम होंगे?
माननीय एन.एन. सरकारः मैं ‘बहुत बड़ी संख्या’ वाक्यांश को स्वीकार नहीं करता हूं और न ही मैं यह सोचता हूं कि इसके परिणाम भीषण होंगे।
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- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अध्यक्ष महोदय! क्या मैं आपका ध्यान एक क्षण के लिए उन एक या दो प्रश्नों की ओर आकृष्ट कर सकता हूं, जो माननीय नृपेन्द्र सरकार द्वारा पूछे गए थे। इसका कारण यह है, हो सकता है कि मेरी बारी आने पर वह यहां उपस्थित न रहें? माननीय नृपेन्द्र सरकार ने कहा कि उन्हें पिछले वर्ष तीसरे गोलमेज सम्मेलन के दौरान एक तार मिला था और वह तार उन्होंने मुझे दिखाया था और मैंने उस तार के बारे में पूछताछ की थी और उस तार के उत्तर में मुझे कुछ तार मिले थे। मैं यह मुद्दा स्पष्ट करना चाहूंगा, ताकि माननीय नृपेन्द्र सरकार को मेरे गलत बयान करने पर मुझे सुधारने का मौका मिल सके। जो तार मुझे मिला था वह किसी जांच के जवाब में नहीं था, जो मैंने की थी।
माननीय एन.एन. सरकारः मैं इस विषय को यहीं खत्म करना चाहूंगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं संक्षेप में कुछ कहना चाहता हूं।
अध्यक्षः कृपया डॉ. अम्बेडकर को अपनी बात कहने दें।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः नृपेन्द्र सरकार को सम्बोधित तार भारत के समाचार-पत्रों में प्रकाशित हुआ था, जब अस्पृश्यता निवारण मंडल के सदस्यों को, जिसकी स्थापना महात्मा गांधी ने अपने अनशन के बाद की थी, यह ज्ञात हुआ कि यह तार पूना समझौते का विरोध करते हुए माननीय नृपेन्द्र सरकार को भेजा गया है, उन्होंने अपनी मर्जी से यह तार मुझे भेजा जिसका माननीय नृपेन्द्र सरकार ने उल्लेख किया है। वह मेरी किसी जांच के उत्तर में नहीं था। अगली बात जो मैं समिति के ध्यान में लाना चाहता हूं, वह यह है कि जब माननीय नृपेन्द्र सरकार ने पूना समझौते के विरोध में अपने बंगाली मित्रों से प्राप्त तार मुझे दिखाया था, तो उन्होंने मुझसे कहा था कि वह केवल इतना करेंगे कि तार को प्रधानमंत्री के पास उनकी सूचनार्थ बिना किसी टिप्पणी के भेज देंगे। अपने जाने से एक दिन पहले उन्होंने उस पत्र की एक प्रति कृपापूर्वक मुझे भेजी थी, जो उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजा था। उस पत्र में मैंने देखा कि माननीय नृपेन्द्र सरकार ने वह पत्र प्रधानमंत्री को भेजा ही नहीं था, अपितु प्रधानमंत्री से यह जांच करने का आग्रह किया था कि क्या पूना
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 25 जुलाई 1933, पृ. 899