310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः मैं भारत मंत्री से पूछना चाहूंगा कि क्या स्वीकार संबंधी पत्रों को, जो संघ में शामिल होने पर विभिन्न राज्यों द्वारा पारित किए जाएंगे, संविधान अधिनियम में कोई स्थान मिलेगा?
माननीय सेम्युअल होरः नहीं मिलेगा।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मान लीजिए कि संघीय न्यायालय में कोई विवाद उठे, तो उस न्यायालय को तय करना होगा कि कोई विषय विशेष जो विवाद की विषय-वस्तु है, संघ की क्षमता के अंतर्गत आता है अथवा नहीं?
माननीय सेम्युअल होरः यहां पर मैं एक अनजान आदमी की भांति बोल रहा हूं। वे संधि को ध्यान में रखेंगे, जिस तरह वे अब रख रहे हैं।
माननीय तेज बहादुर सपू्रः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किन्तु क्या वह संविधान अधिनियम का अंग नहीं होगा?
माननीय सेम्युअल होरः नहीं, वह संविधान अधिनियम में नहीं होगा। संसद के किसी भी अधिनियम में इस समय संधियां नहीं हैं, फिर भी (माननीय तेज बहादुर सपू्र तथा अन्य भारतीय, भूल हो तो सुधार दें) संधियों को सर्वदा ध्यान में रखा गया है।
माननीय तेज बहादुर सपू्रः हां, संधियां सर्वत्र म्युनिसिपल कानून के अंतर्गत आती हैं।
* * * *
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽऽः मैं भारत मंत्री का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं कि श्वेत-पत्र के प्रस्ताव 70 के अधीन गवर्नर जनरल द्वारा विधिपूर्ण रूप से जारी किए गए आदेशों का पालन करना गवर्नर का विशेष उत्तरदायित्व है?
माननीय सेम्युअल होरः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि गवर्नर जनरल वित्त से संबंधित ऐसे कोई आदेश जारी करता है, जिनका पालन करना प्रांतीय सरकारों से अपेक्षित है, तो गवर्नर इनका पालन सुनिश्चित करेगा?
माननीय सेम्युअल होरः हां, संघीय कराधान के क्षेत्र में यह सही है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि संघ द्वारा जारी किए गए ऐसे कोई आदेश हों, जिनका पालन प्रांतीय सरकार द्वारा किया जाना अपेक्षित है, तो इस बात का ध्यान रखना गवर्नर का विशेष उत्तरदायित्व है कि उन आदेशों का पालन हो?
माननीय सेम्युअल होरः हां, गवर्नर जनरल द्वारा जारी किए गए आदेश।
माननीय हरी सिंह गौड़ः विधिसम्मत रूप में जारी किए गए।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः वास्तव में, विधिसम्मत रूप में जारी किए गए,
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 28 जुलाई 1933, पृ. 990
ऽऽ वही, पृ. 1002-03