11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 328

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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एक और प्रश्न, श्वेत-पत्र प्रस्तावों के उस भाग में, जिसमें केंद्र और प्रांतों के प्रशासनिक संबंधों का वर्णन है, मैं बिना तैयारी के बोल रहा हूं, मेरी राय में यह उपबंध किया गया है कि प्रांतीय अभिकरण का केंद्र द्वारा उपयोग केंद्रीय विषयों का प्रशासन करने के लिए किया जाएगा या नहीं, यह देखना प्रांत का काम है। वह अपनी व्यवस्था का इस काम के लिए उपयोग कर सकता है?

माननीय सेम्युअल होरः हां, मैंने अन्य संघों से प्राप्त अनुभव के प्रकाश में सदैव यही आशा की है कि हमें यथासंभव कम से कम दो समानांतर प्रशासन खड़े करने चाहिए और सामान्यतः बेहतर होगा कि प्रांतीय प्रशासन संघीय-क्षेत्र के अंतर्गत संघ के निर्देशों का पालन करे और संपूर्ण भारत में दोहरी शासन प्रणाली खड़ी न की जाए।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं बताना चाहता हूं कि यदि प्रांतीय सरकारें अवज्ञा करने लगें और केंद्रीय सरकार के नियंत्रण में न रहें, तो केंद्र, प्रांतीय अभिकरण का प्रयोग किए जाने के लिए आबद्ध नहीं है और वह केंद्रीय विषयों से संबंधित प्रशासन के लिए अपने संघ के अभिकरण का प्रयोग कर सकता है?

माननीय सेम्युअल होरः बातें ऐसी ही हैं।

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  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः मैं कहना चाहता हूं कि बंगाल का प्रशासन स्तर ऐसा ही है, क्योंकि बंगाल स्थायी बंदोबस्त के अधीन पर्याप्त राजस्व जुटाने में असमर्थ रहा है। यह एक ही बात को कहने का दूसरा तरीका है?

माननीय सेम्युअल होरः यह एक कारण है, फिर भी हमें यह स्वीकार करना पड़ेगा कि वहां स्थायी बंदोबस्त है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह सही है।

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  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽऽः श्वेत-पत्र में साधन जुटाने का कोई उल्लेख नहीं है, अर्थात् प्रांतीय प्रयोजनों के लिए एक आना उन परिस्थितियों में संघीय प्रयोजनों के लिए दूसरा आना जुटाए बिना, जो पूर्वानुमान के अनुसार आवश्यक नहीं है। दूसरी परिकल्पना यह हो सकती है कि प्रांतों के लिए और अधिक आयकर की आवश्यकता नहीं है, किन्तु संघ सरकार के लिए इसकी आवश्यकता है और तब आपको दुगनी रकम जुटानी होगी। कल्पना कीजिए कि विहित प्रतिशत 50ः 50 हो, तब दो आने जुटाने होंगे, ताकि संघ सरकार एक आना प्राप्त कर सके, क्योंकि जो भी वह प्राप्त करेगी, उसमें से उसे एक आना प्रांतों को देना होगा, चाहे वे उसे लेना चाहें या नहीं?

माननीय सेम्युअल होरः मैं इन सब बातों को ध्यान में रखूंगा। मैं समिति के सदस्यों को इस बाबत स्मरण कराना चाहता हूं कि विसंगतियां होंगी (चाहे कोई भी व्यवस्था क्यों न की जाए)। मैं ठीक-ठीक यह नहीं बता सकता कि श्वेत-पत्र में क्या परिकल्पित है, लेकिन ऐसी प्रत्येक प्रणाली में, जिसमें केंद्र और प्रांतों के मध्य आयकर का विभाजन