11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 329

312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

होता है, किसी न किसी प्रकार की विसंगतियां होना स्वाभाविक है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं भारत मंत्री और माननीय ऑस्टिन चैम्बरलेन का ध्यान दो बातों की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं। माननीय ऑस्टिन ने कहा कि प्रांत यदि अपने स्वयं के प्रयोजनार्थ किसी प्रकार का आयकर वसूल करना चाहे, तो वह ऐसा उपबंध नहीं कर सकता। मैं उनका ध्यान प्रस्ताव 139 और कोष्ठक में दिए गए इन शब्दों की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं, ‘विहित प्रतिशत हाशिए में विनिर्दिष्ट संसाधनों से प्राप्त शुद्ध राजस्व के 50 प्रतिशत से कम और 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।’

माननीय सेम्युअल होरः वह आयकर है - ‘(प्रांतों द्वारा अधिरोपित किन्हीं अधिभारों से पृथक)’। मेरी समझ में इससे यह अभिप्रेत है कि प्रांतों को अपने प्रयोजनार्थ आयकर पर अधिभार लगाने का अधिकार होगा।

माननीय ए.पी. पात्रोः यह उसके अतिरिक्त है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः प्रस्ताव 139 यही है?

माननीय सेम्युअल होरः यही, और समिति को मैं यह स्मरण कराना चाहता हूं कि हमने इसे प्रस्तावना के पृष्ठ 30 के ऊपरी भाग में स्पष्ट किया है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं भारत मंत्री का ध्यान उनके अभी-अभी किए गए कथन की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं, जो संघीय प्रयोजनों के लिए आयकर लगाने के संबंध में है। उन्होंने कहा है कि ऐसा करने के लिए गवर्नर जनरल की पूर्व मंजूरी अति आवश्यक है। मैं उनका ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं कि प्रस्ताव 141 में यह परिकल्पित नहीं है कि संघीय प्रयोजनों के लिए अधिभार के लिए गवर्नर जनरल की पूर्व मंजूरी लेनी होगी। गवर्नर जनरल की पूर्व मंजूरी प्रांतों को आवंटित राजस्व, अर्थात् प्रस्ताव 138 और 139 में दिए गए राजस्व की वसूली के लिए आवश्यक है। पैरा 141 में गवर्नर जनरल की पूर्व मंजूरी का कोई उल्लेख नहीं है।

माननीय सेम्युअल होरः मेरे विचार में डॉ. अम्बेडकर ने बिलकुल सही कहा है और मुझे अपने उत्तर को उस टिप्पण के संदर्भ में देखना होगा, जो मैं परिचालित करूंगा।

माननीय अकबर हैदरीः अनन्यतः संघीय शीर्षों में शीर्ष 49 भी है, जिसमें निश्चित रूप से कहा गया है, अनन्यतः संघीय शीर्षों के अंतर्गत ‘कृषि आय या निगमों की आय से भिन्न आय पर कर लगाने और प्रशासन हेतु अधिभार लागू करने की प्रांतों की शक्ति के अधीन रहते।’

लॉर्ड यूसटेस परसीः मैं नहीं समझता कि वह इसे निष्प्रभावी कर देता है, क्योंकि जितने भी साक्ष्य हमने प्राप्त किए हैं और जो भी साक्ष्य हमने भारत में सुने हैं, वे सब प्रांतीय अधिभारों के घोर विरोधी थे।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे पक्का विश्वास है कि यह व्यापारी लोगों का मत है।