11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 332

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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मुझे सुधार दें, यदि मैं गलत हूं कि उनमें से तीसरे भार, अर्थात् अधिभार के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या आप इस बात से सहमत हैं कि ये ऐसी उपयुक्त शर्तें हैं, जिनके अंतर्गत संघ अधिभार का संकल्प पारित करेगा?

माननीय सेम्युअल होरः मैं तो यही सोचता हूं। मैं शब्दों के झंझट में नहीं पड़ना चाहता। परन्तु मेरी समझ में यह सामान्यतः व्यवस्था का उचित आधार प्रतीत होता है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अगला प्रश्न, जो मैं आपसे पूछना चाहता हूं, वह इस बात से पैदा होता है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रहती है या प्रस्ताव 141 के अधीन यथा स्थिति बनाए रखी जाती है, तो क्या ऐसा नहीं होगा कि संघ अपना वित्त पूर्णतः अप्रत्यक्ष कराधान के आधार पर प्राप्त करता होगा?

माननीय सेम्युअल होरः पूर्णतः अप्रत्यक्ष कराधान के आधार पर नहीं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः काफी सीमा तक?

माननीय सेम्युअल होरः स्पष्टतः काफी सीमा तक जैसा कि वर्तमान में है, तब अप्रत्यक्ष कराधान भारतीय राजस्व में बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः माननीय सेम्युअल होर! मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि वर्तमान की अपेक्षा संघ के अधीन मात्र इस कारण से यह और भी ज्यादा होगा कि ब्रिटिश भारतीय प्रत्यक्ष कराधान के लिए सहमत नहीं होंगे, क्योंकि राज्य इसके लिए तैयार नहीं होंगे और इसके परिणामस्वरूप, दोनों अलग-अलग अप्रत्यक्ष कराधान वहन करना चाहेंगे और वे प्रत्यक्ष कराधान के लिए सहमत नहीं होंगे और प्रत्यक्ष कराधान केवल ब्रिटिश भारतीय ही वहन करेंगे। इस दृष्टि से, वर्तमान की अपेक्षा अप्रत्यक्ष कराधान उन पर अधिकाधिक थोपा जाएगा।

माननीय सेम्युअल होरः दूसरे दृष्टिकोण से, मैं यह कल्पना कर सकता हूं कि राज्य प्रायः कम अप्रत्यक्ष कराधान के पक्ष में होंगे।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः ऐसा इसलिए है कि उन्हें अब एक पैसा भी प्राप्त नहीं हो रहा है। क्या बाद में भी ऐसा ही होगा? यदि वे अप्रत्यक्ष कराधान का विरोध करेंगे, तो उन्हें कराधान का भार वहन करना पड़ेगा?

माननीय सेम्युअल होरः डॉ. अम्बेडकर को इस शक्ति त्रिकोण में यह याद होगा कि प्रांतों की रुचि और हित प्रत्यक्ष कराधान में ही है, क्योंकि इसमें उन्हें एक अंश प्राप्त होगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः ठीक है, ऐसा हो सकता है, किंतु प्रांत यह चाहते हैं कि संघ ब्रिटिश भारत से वसूल किए गए भारतीय राजस्व का पूर्णरूपेण स्वामी न हो। यह बात काल्पनिक प्रतीत हो सकती है, फिर भी मैं इस ओर ध्यान आकृष्ट करना