भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
राज्यों के साथ नहीं है?
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- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः नहीं, यदि आप मुझे इजाजत दें, जैसा कि आपने अनुदेश पत्र संबंधित ज्ञापन के बाबत स्पष्ट किया था कि यदि गवर्नर अवज्ञा करता है, तो उसे वापस बुलाया जा सकता है। राज्यों और केंद्र के संबंधों के बारे में ऐसा कोई उपबंध नहीं है।
माननीय सेम्युअल होरः प्रत्येक स्थिति में गवर्नर जनरल का उत्तरदायित्व उसके विवेकाधिकार पर आधारित है, अर्थात् वह यहां से दिए जाने वाले अनुदेशों के तहत है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः परन्तु मेरा कहना यह है कि जिस प्रकार गवर्नर प्रांत के प्रशासन के बाबत गवर्नर जनरल की शक्ति के अधीन है, देशी राज्य का शासक गवर्नर जनरल के विवेकाधिकार के अधीन नहीं है। संघ से संबंधित ऐसे मामलों का प्रशासन वायसराय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत है।
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- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किंतु, जैसा कि आपने कहा, सर्वोच्च सत्ता वायसराय को प्राप्त है, न कि गवर्नर जनरल को?
माननीय सेम्युअल होरः हां, किंतु परिणाम एक ही होगा।
माननीय जफरुल्ला खांः गवर्नर जनरल वायसराय से औपचारिक रूप में अनुरोध करेगा और तत्पश्चात वायसराय इस संबंध में कार्रवाई करेंगे।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसी से उत्पन्न मैं एक प्रश्न करना चाहता हूं। इसका एक और पहलू भी है। मान लीजिए कि जो राज्य अंशदान करने के लिए जिम्मेदार हों, वे उसी समय अर्थक्षम होंगे, जब उनसे अंशदान मांगा जाएगा। क्या इस बाबत श्वेत-पत्र में कोई उपबंध है कि गवर्नर जनरल को जो कुछ सीमा तक अपने वित्त के लिए देशी राज्यों से प्राप्त होने वाले इन अंशदानों पर आश्रित हैं, यह सुनिश्चित करने की शक्ति प्राप्त है कि अंशदान देने वाले ये राज्य उस समय, जब अंशदान करेंगे तभी अर्थक्षम होंगे?
राव बहादुर माननीय कृष्णामाचारीः प्रांतों के संबंध में क्या उपबंध है? क्या प्रांतों के लिए भी ऐसा कोई उपबंध है?
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः हां, गवर्नर यह प्रमाणित कर सकता है कि संघ को कुछ राशियां देय हैं और वे उसे दे दी जाएं।
माननीय जफरुल्ला खांः क्या मैं उस सुझाव की ओर ध्यान दिला सकता हूं, जो मैंने यहां प्रारंभिक चर्चा के दौरान दिया था कि वायसराय राज्यों से, जो कि संघ की इकाई हैं, यह अपेक्षा कर सकता है कि उसे वे अपने हिसाब-किताब की लेखा-परीक्षित प्रतियां उसके सूचनार्थ प्रस्तुत करें?
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 3 अक्तूबर 1933, पृ. 1032