11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 335

318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः एक और बात है। भारत मंत्री इसका संयुक्त रूप से उत्तर दे सकते हैं। पैरा 146 में उधार लेने की शक्तियां दी गई हैं और उसमें यह व्यवस्था है कि संघ संघीय राजस्व की प्रतिभूति पर उधार ले सकता है। प्रस्ताव 141 के अधीन दिए गए अंशदान संघीय राजस्व के भाग होंगे, जो उन ऋणों के लिए प्रतिभूति होंगे, जो संघ लेगा। क्या आप कह सकते हैं कि यह संघ के ऋण के लिए पर्याप्त होगा? यदि राजस्व के कुछ भाग को जो संघ संघीय ऋणों की प्रतिभूति के लिए देगा, देने की क्षमता और देने की सहमति, दोनों को इस अनिश्चित स्थिति में लटकाया जा सकता है?

माननीय सेम्युअल होरः वास्तव में, मैंने यह सोचा होगा कि डॉ. अम्बेडकर जिस आकस्मिकता की बात कर रहे हैं, उसके प्रायः पैदा होने की संभावना नहीं है और यदि यह पैदा होती है, तो भी यह ऐसी आकस्मिकता नहीं होगी, जिससे संघ की सारी ऋण व्यवस्था ही बदल जाए। आखिरकार, ये समस्त रकमें कुल मिलाकर बहुत थोड़ी हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे नहीं मालूम कि कितनी राशियां हैं?

माननीय सेम्युअल होरः और एक बार चूक की स्थिति में।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे आशा है कि वे बहुत कम नहीं होंगी?

माननीय सेम्युअल होरः मैं नहीं समझता कि इससे भारत की व्यवस्था पर कोई विशेष अंतर पड़ेगा।

माननीय अकबर हैदरीः क्या राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वोच्च सत्ता के प्रयोग से प्रांतों की अपेक्षा बेहतर नहीं है, जिनमें गवर्नर का विशेष उत्तरदायित्व है?

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरे विचार से माननीय मिर्जा इस्माइल के कल के कथन से बड़ी दयनीय स्थिति का पता चलता है।

माननीय अकबर हैदरीः यह फिर भी एक संतुलित बजट था, जिसके द्वारा वह अपनी बात ठीक ढंग से कह सके।

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19,279. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः महोदय! मैं भारत मंत्री को यह बताना चाहूंगा कि भारत सरकार अधिनियम में दी गई यह अभिव्यक्ति ‘वर्तमान और प्रोद्भूत अधिकार’ ऐसी अभिव्यक्ति है, जो दक्षिण अफ्रीकी संविधान अधिनियम में भी पाई जाती है। हमें डोमिनियन कार्यालय से विवरण प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि इस अभिव्यक्ति पर दक्षिण अफ्रीका में किस प्रकार कार्रवाई की गई है?

माननीय सेम्युअल होरः हमने इस बारे में पूछताछ की थी। डॉ. अम्बेडकर ने,

ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 3 अक्तूबर 1933, पृ. 1056

ऽऽ वही, पृ. 1058

ऽऽऽ वही, पृ. 1058

ऽऽऽऽ वही, पृ. 1072