भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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डॉ. भीमराव अम्बेडकरः विधान के संबंध में भी यही स्थिति है।
माननीय ऑस्टिन चैम्बरलेनः मैं भी यही समझता हूं।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः जहां तक प्रशासन का संबंध है, मेरी समझ में स्थिति यह होगी कि कार्यपालिका को संघीय विधान-मंडल द्वारा पारित समवर्ती विधि लागू किए जाने के संबंध में प्रांतीय गवर्नरों के माध्यम से प्रांतीय सरकार को निर्देश और अनुदेश जारी करने का प्राधिकार होगा और जहां तक मैं समझता हूं, गवर्नर इनका पालन करने के लिए बाध्य होंगे।
मारक्वेस ऑफ रीडिंगः इस बात के बारे में भारत मंत्री अपने उत्तर में इंकार कर चुके हैं।
माननीय हरी सिंह गौड़ः दंड देने संबंधी एक खंड होना चाहिए कि जो व्यक्ति अप्राधिकृत समाचारपत्र प्रकाशित करेगा उसे दंडित किया जाएगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या मैं एक दृष्टांत दे सकता हूं जो मुझे सूझा है? कल्पना कीजिए कि आपातस्थिति में केंद्रीय सरकार एक प्रेस अधिनियम पारित करे, जिसमें यह उपबंधित हो कि एक प्रतिभूति राशि का निक्षेप किए बिना किसी भी समाचारपत्र का प्रकाशन शुरू नहीं किया जाएगा। अब इस प्रकार के विधान से किसी विशिष्ट गैर-सरकारी व्यक्ति पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। कल्पना कीजिए, किसी विशिष्ट प्रांत में ऐसा कोई समाचारपत्र है, जो तत्कालीन सरकार की सहायता कर रहा है, जिसे हम पार्टी का समाचारपत्र कह सकते हैं और इस समाचारपत्र से प्रेस अधिनियम, जिसे केंद्रीय विधान-मंडल द्वारा पारित किया गया है, का उल्लंघन हो रहा है और इस विशिष्ट समाचारपत्र, पत्रिका तथा प्रांत की सरकार में संबंध होने के कारण, सरकार उक्त समाचारपत्र, पत्रिका के विरुद्ध कार्रवाई करने से इंकार कर देती है, तब क्या स्थिति पैदा होगी? निश्चय ही इस खास मामले में कोई व्यक्ति प्रभावित नहीं है?
माननीय हरी सिंह गौड़ः दंड देने संबंधी एक खंड होना चाहिए कि जो भी व्यक्ति अप्राधिकृत समाचारपत्र प्रकाशित करेगा, उसे दंडित किया जाएगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः बिल्कुल सही बात है।
माननीय ऑस्टिन चैम्बरलेनः सूचना प्राप्त होते ही सरकार का संपूर्ण तंत्र कार्रवाई करेगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि किसी विशिष्ट अधिकारी को अभियोजित किया जाता है और यदि स्थानीय सरकार इस अभियोजन के लिए खर्चा तो देती है, किंतु इसके लिए बजट में कोई उपबंध नहीं किया जाता है, तब क्या होगा?
माननीय सेम्युअल होरः मैं इन कठिनाइयों से अवगत हूं। साथ ही मैं दूसरे पक्ष की
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 12 अक्तूबर 1933, पृ. 1178-81