324 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कठिनाइयों को भी समझता हूं। डॉ. अम्बेडकर द्वारा कही गई बात का संबंध अवश्यमेव विधि और व्यवस्था के प्रश्न से है, और विधि और व्यवस्था प्रांतीय विषय है तथा इसमें उसका हित है। संघ का हित समरूपता में है, किंतु इससे इस तथ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा कि यह प्रधानतः प्रांतीय विषय है। यदि मैं कहूं कि डॉ. अम्बेडकर के प्रश्न और माननीय ऑस्टिन चैम्बरलेन के प्रश्न में दिए गए तर्कों पर तर्कसंगत निष्कर्ष निकालने के लिए जोर दिया गया है, तो वास्तव में इसका अभिप्रेत यह नहीं है कि प्रांतों में विधि और व्यवस्था संघ के नियंत्रणाधीन होगी, और यह प्रत्यक्षतः श्वेत-पत्र में उल्लिखित सिद्धांतों के प्रतिकूल है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्षमा कीजिए! मेरा कहना तो यह है कि या तो आप विधि और व्यवस्था को विशुद्धतः प्रांतीय नियंत्रण के अधीन प्रांतीय विषय रखें, जिससे केंद्र का कोई संबंध न हो और वास्तव में तब आपका यह तर्क सही होगा, जो आपने अभी-अभी दिया है। किंतु यदि आप इसे समवर्ती सूची का विषय बना रहे हैं, तो विधि और व्यवस्था का उत्तरदायित्व संघ का होगा।
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13,129. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः भारत मंत्री महोदय! मैं आपका ध्यान भारत सरकार अधिनियम में दी गई समवर्ती सूची की वर्तमान स्थिति की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं। मैं इसलिए चिंतित हूं कि आपको यह बताया गया है कि वर्तमान भारत सरकार अधिनियम के अधीन कतिपय विषय या विषयों के भाग केंद्रीय विधान-मंडल के अधीन रखे गए हैं। जिस बात की ओर मैं आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं, वह यह है कि सर्वप्रथम ऐसे कुछ प्रांतीय विषय हैं, जिन्हें न्यायिक नियमों (डिवोलूशन रूल्स) के भाग-2 की प्रथम अनुसूची के विनिर्दिष्टतः समवर्ती बनाया गया है?
माननीय सेम्युअल होरः हां।
13,130. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः जब विषय प्रांतीय रखे गए हैं, तो वे इस प्रावधान द्वारा नियंत्रित हैं कि वे केंद्रीय विधान-मंडल के विषय हैं?
माननीय सेम्युअल होरः हां।
13,131. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैंने यह हिसाब लगाया है कि न्यायिक नियमों के भाग-2 की प्रथम अनुसूची में दिए गए 51 विषयों में से 14 विषय अभिव्यक्त रूप में केंद्रीय विधान-मंडल के अधीन रखे गए हैं अथवा केंद्रीय सरकार अथवा भारत मंत्री द्वारा बनाए गए नियमों के अधीन हैं। एक तो यह बात और दूसरी यह कि सभी प्रांतीय विषय भारत सरकार अधिनियम की धारा 67, उपधारा (2) के अधीन पूर्व मंजूरी के उपबंध के कारण केंद्रीय सरकार के समवर्ती अधिकारिता के अधीन हैं। यद्यपि किसी भी विषय को भाग-2 के अधीन प्रांतीय विषय माना जा सकता है, फिर भी केंद्रीय सरकार को उस संपूर्ण केंद्रीय विषय के संबंध में विधान बनाने की स्वतंत्रता है, परंतु यह तब, जब कि गवर्नर जनरल से पूर्व मंजूरी प्राप्त कर ली गई हो?