326 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
संघ के अधीन की परिस्थितियों, जिनमें प्रांत स्वायत्त हैं, के अंतर को स्पष्ट करना चाहूंगा। हम निश्चित रूप से भारत सरकार के स्वरूप में अति केंद्रीयकृत सरकार से संघीय सरकार में परिवर्तन कर रहे हैं।
13,138. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किंतु मैं उस विषय के महत्त्व के बारे में बता रहा हूं, वह विषय जो 1901 तक अखिल भारतीय महत्त्व का माना गया था, सहसा अखिल भारतीय महत्त्व का न रहकर विशुद्धतः स्थानीय विषय बन गया है। मैं जानता हूं कि नई प्रांतीय सरकार को काफी रिआयत दी जानी चाहिए। इस तथ्य को सदैव मानना होगा कि भारत सरकार आज एक स्थानीय महत्त्व से अधिक मानी गई है?
माननीय सेम्युअल होरः मेरे विचार में ऐसी तुलना कठिन है, क्योंकि यह स्वीकार किया जा चुका है कि प्रस्तावित सरकार का स्वरूप एक भिन्न प्रकार की सरकार का स्वरूप है। मेरे विचार में ज्यों ही एकात्मक सरकार से संघीय सरकार में, जिसमें प्रांत स्वायत्त होंगे, परिवर्तन कर दिया जाएगा, नई समस्याएं पैदा होंगी।
13,139. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं इस पर और आगे जोर नहीं दूंगा। फिर भी मैं आपका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि इन विषयों को अब तक विशुद्ध प्रांतीय विषयों की अपेक्षा अधिक महत्त्व का माना गया है?
माननीय सेम्युअल होरः फिर भी मेरी समझ में यह कहना उपयुक्त रहेगा कि इनमें से अधिकांश में प्रशासन अति केंद्रीयकृत सरकार के अधीन भी प्रांतीय रहा है।
13,140. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः हां, केंद्र के नियंत्रणाधीन विषय?
माननीय सेम्युअल होरः पुनः मेरी समझ में मेरे उत्तर से संबंधित डॉ. अम्बेडकर की टिप्पणी के अंतर्गत संपूर्ण क्षेत्र आ जाता है। इसमें प्रांतों के अंतरित विषय सम्मिलित नहीं होंगे।
13,141. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः नहीं, अब मैं आपका ध्यान प्रस्ताव 125 और भारत सरकार अधिनियम की धारा 45 की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं। भारत सरकार अधिनियम की धारा 45 आज्ञा पालन खंड है और इसमें यह उल्लिखित है कि प्रांतीय सरकार शासन और अपने प्रांतों विषयक मामलों में भारत सरकार के अधीक्षण और नियंत्रण में होगी और उन समस्त मामलों से संबंधित अपनी कार्यवाहियों के बारे में भारत सरकार को ध्यानपूर्वक और नियमित रूप से अवगत कराती रहेगी, जिन विषयों से संबंधित उसकी राय में उसे सूचित किया जाना अपेक्षित है। अब, भारत मंत्री महोदय! मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कि इस धारा 45 के किन उपबंधों और अपेक्षाओं को आप निकालना चाहते हैं। मेरे विचार में आप अधीक्षण पसंद नहीं करते। वास्तव में, यह स्पष्ट है कि जब प्रांत स्वायत्त हो जाएंगे, तो आप केवल उन विषयों से संबंधित निदेश रखना चाहते हैं, जो गैर-समवर्ती होंगे?
माननीय सेम्युअल होरः हां।
13,142. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः और कोई नियंत्रण नहीं? अब मैं यह प्रश्न पूछना चाहता हूं कि क्या आप चाहते हैं कि केंद्रीय सरकार को उस सबसे अवगत कराया जाना चाहिए, जो प्रांतीय प्रशासन के क्षेत्र में हो रहा है और क्या आप यह समझते हैं कि केंद्रीय