भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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अधिरोपित नहीं किया गया और दूसरा पक्ष कहता है कि इसमें वित्तीय भार सौंपा गया है, तो इस विवाद को तय किया जाना चाहिए? सामान्यतः उदाहरणार्थ, केंद्रीय सरकार नए प्रांतों के लिए नई सेवा का प्रस्ताव करती है, तो निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इससे वित्तीय भार सौंपा गया, किंतु ऐसे भी मामले हो सकते हैं, जो मिलते-जुलते हैं और जिनमें कोई विशिष्ट अंतर नहीं है, ऐसे मामलों में विवाद होना स्वाभाविक है?
माननीय सेम्युअल होरः वर्तमान उपबंधों के अनुसार ऐसा विवाद पैदा होने पर संघीय न्यायालय का आश्रय लिया जाएगा। तथापि, यह ऐसा तरीका नहीं है, जिस पर पर्याप्त रूप से विचार किया गया हो और जैसा कि मैंने पहले कहा है कि हम ऐसे मामलों में जो संघीय न्यायालय द्वारा तय किए जाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, मध्यस्थता पद्धति अपनाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
13,152. श्री एम.आर. जयकरः अब यह पैरा 155 (ई) के अंतर्गत दिया गया है?
माननीय सेम्युअल होरः हां, संघीय न्यायालय।
13,153. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः एक और प्रश्न मैं भारत मंत्री महोदय! आपसे पूछना चाहता हूं, क्योंकि मैं इसके बारे में स्पष्ट नहीं हूं। मैं उन प्रशासनिक संबंधों की बाबत जानना चाहता हूं, जिन्हें केंद्रीय सरकार सर्वप्रथम प्रांतीय सरकार से अपने अभिकर्ता के रूप में कार्य कराने के लिए आबद्ध है?
माननीय सेम्युअल होरः हां, समवर्ती क्षेत्र में ऐसा कर सकती है।
13,154. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या वह आबद्ध है?
माननीय सेम्युअल होरः हां।
13,155. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या वह अपने अभिकर्ता नियोजित नहीं कर सकती है?
माननीय सेम्युअल होरः हमारा आशय है कि समवर्ती क्षेत्र में प्रशासन प्रांतीय होना चाहिए।
13,156. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसके निर्देशों का पालन किया जाएगा अथवा नहीं, यह भिन्न बात है?
माननीय सेम्युअल होरः हां।
13,157. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः तब यह भी स्पष्ट है कि प्रांतीय सरकारें केंद्रीय सरकार के अभिकर्ता के रूप में अवश्य ही कार्य करेंगी, जब भी उनसे ऐसा करने के लिए कहा जाएगा?
माननीय सेम्युअल होरः हां, संघीय कानून के अधीन।
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13,411. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः सांप्रदायिक रूप से पिछड़े वर्गों को भी कुछ
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 17 अक्तूबर 1933, पृ. 1206