330 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
स्थान प्रदान करके इसमें सम्मिलित किया गया है। क्या इससे ये वर्ग ‘अल्पसंख्यक’ की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आ जाएंगे? मेरा कहने का अभिप्राय यह है कि वे अल्पसंख्यक जिनके बारे में आपने अभी-अभी कहा वे समुदाय होंगे जो ‘सांप्रदायिक निर्णय’ के अंतर्गत आते हैं और इसमें सम्मिलित हैं। मुझे उम्मीद करनी चाहिए कि पिछड़े वर्ग भी ‘सांप्रदायिक निर्णय’ में सम्मिलित कर लिए जाएंगे?
माननीय सेम्युअल होरः इस विचार-विमर्श के उपरांत यह बेहतर होगा कि छोड़े गए क्षेत्रों के बाहर बिखरे उन लोगों के बारे में जो अपेक्षाकृत संख्या में कम हैं, अत्यंत कठिन प्रश्न पर एक बार फिर दृष्टिपात कर लिया जाए और कदाचित समिति के सदस्य तथा प्रतिनिधि भी इस बात पर सर्वोत्तम तरीके से विचार करेंगे।
13,412. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः भारतमंत्री महोदय! मैं आपका ध्यान अपराधी जनजातियों की विचित्र स्थिति की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं। ये अपराधी जनजातियां सामान्य आबादी में न्यूनाधिक रूप में बिखरी हुई हैं। मैं बंबई के बारे में अपना अनुभव बताना चाहता हूं। ऐसी ही स्थिति अन्य प्रांतों में है। सामान्य जनसंख्या के बीच बिखरी हुई इन अपराधी जनजातियों के संरक्षण के लिए भारत सरकार अधिनियम की ही भांति क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट अधिनियमित किया जाना चाहिए। यहां मैं एक दृष्टांत दे रहा हूं, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके। इस अधिनियम में गवर्नरों को इन लोगों के आवागमन और हितों से संबंधित विनियम बनाने की शक्ति प्रदान की जानी चाहिए। क्या पैरा 106 के अधीन गवर्नर को इन बिखरे हुए लोगों के रहन-सहन के ढंग को प्रभावित करने वाले या इन्हें संरक्षित किए जाने से संबंधित ऐसे कुछ विनियम बनाने की शक्ति प्रदान करना संभव नहीं है?
माननीय सेम्युअल होर ः इन खंडों के अधीन अपवर्जित और आंशिक रूप से अपवर्जित, दोनों क्षेत्रों में ही संभव होगा।
13,413. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपसे जानना चाहता हूं कि क्या उदाहरण के लिए पैरा 108 के अधीन ऐसा करने की स्वतंत्रता नहीं होगी कि एक बार किसी व्यक्ति की, जो कि जनजातीय क्षेत्र से संबंधित है, या आदिम वर्ग से संबंधित है, परिभाषा मिल जाने पर उसके लिए वह विधान पारित कर सके चाहे वह अपवर्जित क्षेत्र में निवास करता है या आबादी में, जैसा कि अपराधी वर्गों के संबंध में है। अपराधी वर्गों का विधान विशिष्ट जनजाति के सदस्यों को प्रभावित करेगा, चाहे वे कहीं भी निवास करते हों।
माननीय माल्कम हैलीः ‘द क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ भारत सरकार अधिनियम नहीं है। वे प्रांतीय विधान के विषय बन गए हैं। ‘द क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ विनिर्दिष्टतः गवर्नर की अपेक्षा स्थानीय सरकार को इन लोगों के जो स्थानीय सरकार द्वारा अधिसूचित अपराधी जनजातियों की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं, आवागमन को नियंत्रित और विभिन्न प्रकार से निर्वाधित करने की शक्ति प्रदान करता है। अतः इस आधार पर इन बिखरी हुई आदिवासी जातियों या पिछड़े वर्गों को विशेष संरक्षण प्रदान करना संभव
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 17 अक्तूबर 1933, पृ. 1218