11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 349

332 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय सेम्युअल होरः डॉ. अम्बेडकर की अत्यंत तीक्ष्ण बुद्धि ने श्वेत-पत्र में एक भूल को ढूंढ लिया है।

13,537. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या वह उसमें से धन नहीं ले सकता?

माननीय सेम्युअल होरः मसौदे के अनुसार ऐसा प्रांतीय कोष में से नहीं कर सकता। यह एक कमी है, जिसे हम अंतिम मसौदे में सुधारना चाहते हैं।

13, 538. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः दूसरा पैरा 49 है, जिसकी ओर मैं आपका ध्यान इस संबंध में आकृष्ट करना चाहता हूं। इसके उपखंड (5) का कहना है कि अपवर्जित क्षेत्र के लिए अपेक्षित खर्च गवर्नर जनरल का विशेष उत्तरदायित्व होगा?

माननीय सेम्युअल होरः हां।

13,539. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या मैं यह समझूं कि पूर्णतः अपवर्जित क्षेत्र के प्रशासन में गवर्नर को, जो संभवतः गवर्नर जनरल का एजेन्ट होगा, उतनी धन राशि पर निर्भर करना पड़ेगा, जो उसे अपने विशेष उत्तरदायित्व का प्रयोग करते हुए गवर्नर जनरल द्वारा दी जाए।

माननीय सेम्युअल होरः गवर्नर अपने आप प्रांत से धन मांगेगा।

13,540. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसलिए क्या आप गवर्नर के विशेष उत्तरदायित्व से संबंधित उपबंध का संशोधन करना चाहते हैं, जिससे कि वह पूर्णतः अपवर्जित क्षेत्र के प्रशासन के लिए भी प्रांतीय निधियों से धन ले सके?

माननीय सेम्युअल होरः हां।

श्री एम.आर. जयकरः क्या अब यह पैरा 96 उप-पैरा (ख) के अंतर्गत नहीं आता, ‘गवर्नर प्राक्कलित राजस्व का एक विवरण तैयार करवाएगा’, और फिर आपने उन अतिरिक्त प्रस्तावों (यदि कोई हैं) को पृथक-पृथक विनिर्दिष्ट करने की शक्ति दी है, चाहे मतदान योग्य अथवा मतदान के अयोग्य शीर्षों के अंतर्गत, जिन्हें गवर्नर अपने ‘विशेष उत्तरदायित्वों’ में से किसी की पूर्ति के लिए आवश्यक समझता है। विशेष उत्तरदायित्वों के अंतर्गत अंशतः अपवर्जित क्षेत्र पर किया गया खर्च भी शामिल है।

13,541. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं पूर्णतः अपवर्जित क्षेत्रों की बात कर रहा हूं?

माननीय सेम्युअल होरः डॉ. अम्बेडकर ने जो मुद्दा उठाया है, वह पूर्णतः अपवर्जित क्षेत्र के बारे में है और प्रारूपण में गलती से (इससे अधिक कुछ नहीं) यह दिखाई देगा कि प्रांतीय गवर्नर अंशतः अपवर्जित क्षेत्रों के लिए प्रांतीय निधियों के लिए लिख सकता है, जबकि यह पूर्णतः अपवर्जित क्षेत्रों के लिए प्रांतीय निधियों के लिए नहीं लिख सकता है। यह प्रारूपण की एक कमी है।

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ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 18 अक्तूबर 1933, पृ. 1223-24