भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
प्रिवी कौंसिल में की जाएगी?
335
माननीय सेम्युअल होरः हां।
13,924. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं यह नहीं समझ पाया कि यदि समवर्ती क्षेत्र में समवर्ती विधि से निर्वचन से उत्पन्न किसी मसले में प्रिवी कौंसिल के समक्ष अपील की जा सकती है, तो संघीय न्यायालय से ऐसी अपील करने की इजाजत देने में क्या कठिनाई हो सकती है?
माननीय सेम्युअल होरः इसका एक कारण यह है कि हम संघीय न्यायालय पर काम का अम्बार लादना नहीं चाहते और शुरू में ही बहुत सारे न्यायाधीशों की मांग सुनना नहीं चाहते।
* * * *
14,373. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽऽः भारत मंत्री से मैं पैरा 155 के बारे में एक सवाल पूछना चाहता हूं। यह पैरा 155 संघीय न्यायालय की अन्य आरंभिक अधिकारिता के बारे में है। मुझे कोई अंतर समझ में नहीं आता, जो इसमें किया गया प्रतीत होता है। पैरा 155 को पढ़ने पर मैं यह समझता हूं कि आप संघीय न्यायालय की अनन्य आरंभिक अधिकारिता के विषय में इस आधार पर अंतर करना चाहते हैं कि जहां विवाद के पक्षकार वे हों, जो उपखंड (क) और (ख) में वर्णित हैं, वहां संघीय न्यायालय को अनन्य आरंभिक अधिकारिता दी गई है। किंतु संघीय न्यायालय तब अनन्य आरंभिक अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता, जब पक्षकार गैर-सरकारी व्यक्ति हो। अब मैं जो प्रश्न पूछना चाहूंगा, वह यह है, दोनों स्थितियों में मसला एक ही है, अर्थात संवैधानिक मुद्दा जिसमें संविधान अधिनियम का निर्वचन निहित हो। लेकिन मैं यह नहीं समझ पाया कि पक्षकारों पर आधारित संघीय न्यायालय की अनन्य आरंभिक अधिकारिता के विषय में यह अंतर क्यों होना चाहिए, जबकि मुद्दा वही है?
माननीय सेम्युअल होरः मेरे विचार में संघीय न्यायालयों के साथ प्रायः यही होता है कि आरंभिक अधिकारिता इकाइयों के बीच के विवाद में अधिकारिता होती है और व्यक्ति अपीली अधिकारिता में ही साधिकार आता है।
14,374. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा अभिप्राय यह है कि इसमें जहां संविधान अधिनियम का निर्वचन अंतर्ग्रस्त है, वहां मामला सीधे संघीय न्यायालय में आना चाहिए, तब मेरा विचार है कि इसमें कोई अंतर नहीं किया जा सकता चाहे पक्षकार संघ की इकाइयां हों या गैर-सरकारी व्यक्ति।
माननीय सेम्युअल होरः मैंने यह सोचा था कि यह संघीय न्यायालय की आवश्यक कार्य शर्तों में से एक है। मेरे विचार में यदि उसे व्यक्तिगत मामले में भी आरंभिक अधिकार होगा, तो उसमें मुकदमों का अम्बार लग जाएगा।
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ख, 20 अक्तूबर 1933