3. उप-समिति संख्या 2 (प्रांतीय संविधान) - Page 36

उप-समिति संख्या 2

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प्रश्न है कि क्या इसमें अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि भी होने चाहिए? तीसरा, जहां तक गवर्नर द्वारा मंत्रिमंडल के गठन का संबंध है, हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि यह उसका परमाधिकार है और मंत्रिमंडल के सदस्यों के चयन का कार्य उसके विवेकाधिकार पर छोड़ दिया जाना चाहिए। महोदय! क्या कार्यपालिका के सदस्यों का चयन केवल विधान-मंडल तक सीमित न हो, क्या मंत्रिमंडल में विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रावधान किया जाए और क्या गवर्नर को मंत्रिमंडल के गठन के संबंध में विवेकाधिकार दिया जाए, इन तीन प्रश्नों का मैं ‘हां’ मैं उत्तर देता हूं, किंतु इसके लिए सबसे बड़ी शर्त यह होगी कि कार्यपालिका का गठन कैसे भी किया जाए, वह सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत का पालन करे। यदि कार्यपालिका के लिए सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत को अनिवार्य बना दिया जाता है, तो मेरे विचार से इसमें बाहर से किसी सदस्य को सम्मिलित करने से कुछ क्षति नहीं होगी। उदाहरणार्थ, यदि कार्यपालिका में किसी ऐसे सदस्य को लिया जाता है, जिसका विधान-मंडल से संबंध नहीं है, यदि वह मंत्रिमंडल के साथ सामूहिक जिम्मेदारी को स्वीकार करता है, तो इस प्रकार की प्रक्रिया को न अपनाने का कोई कारण दिखाई नहीं देता। यह कहा गया है कि जब मंत्रिमंडल के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित हो जाने पर सरकार का पतन हो जाता है, तो ऐसा मंत्री जो विधान-मंडल का सदस्य नहीं है, बर्खास्त नहीं होगा, जबकि मंत्रिमंडल के अन्य सभी सदस्यों को जाना होगा और नए मंत्रिमंडल में उसे शामिल किया जा सकता है, इस तरह वह मंत्रिमंडल में हमेशा बना रहेगा। यह विचार भ्रांतिपूर्ण है, क्योंकि जब तक सरकार बनाने के लिए विधान-मंडल से लिए गए सदस्य उसे अपने साथ लेने तथा उसके कार्यों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक वे उसके साथ काम नहीं करेंगे और न ही उसकी सलाह मानेंगे और न ही वह उनकी सलाह मानेगा। उदाहरणार्थ, यदि कोई मुख्यमंत्री किसी बाह्य सदस्य को अपने मंत्रिमंडल में शामिल करने की स्थिति में है और साथ ही उसे सदन का विश्वास भी प्राप्त है, तो ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री को इस प्रकार का विशेषाधिकार न देने का कोई कारण दिखाई नहीं देता।

इसी प्रकार, यदि गवर्नर को अपने मंत्रिमंडल में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की शक्तियां दी जाती हैं और इसके साथ ही यदि यह भी स्पष्ट कर दिया जाता है कि मंत्रिमंडल के लिए नियुक्त होने वाले सदस्य सामूहिक जिम्मेदारी को स्वीकार करेंगे, तो ऐसे में इस तरह का प्रावधान करने में कोई हानि नहीं है। मेरे विचार से इस बात पर बल देने की आवश्यकता है कि मंत्रिमंडल के गठन का अधिकार गवर्नर का हो, बशर्ते कि मंत्रिमंडल सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के अधीन कार्य करे।

अगला प्रश्न यह है कि एकीकृत एवं उत्तरदायी कार्यपालिका का गठन कैसे किया जाए? इसके दो तरीके हो सकते हैं। एक तरीका यह है कि कार्यपालिका के गठन में ही कानून द्वारा उसके स्वरूप को परिभाषित कर दिया जाए। दूसरा तरीका है कि कार्यपालिका का गठन परिपाटी के आधार पर हो। इन दोनों तरीकों का प्रचलन है। सर्वविदित है कि