3. उप-समिति संख्या 2 (प्रांतीय संविधान) - Page 37

20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कनाडा, दक्षिण अफ्रीका अथवा ऑस्ट्रेलिया के संविधान में ‘उत्तरदायी सरकार’ शब्द नहीं है। बड़े आश्चर्य की बात है कि कनाडा के संविधान में इसका भी उल्लेख नहीं है कि गवर्नर को सलाह देने वाले मंत्री विधान-मंडल के सदस्य होंगे, हालांकि वास्तव में वे उसके सदस्य होते हैं। आयरलैंड, माल्टा ओर रोडेशिया के संविधानों में इस विषय को परिपाटी पर न छोड़कर, उसका कानून में प्रावधान कर दिया गया है। हमें मालूम है कि आयरलैंड में प्रधानमंत्री संविधि की उपज है और सामूहिक उत्तरदायित्व संविधान में परिभाषित कर दिया गया है।

मेरे विचार से हमें इन दो में से एक तरीके को अपनाना होगा और ऐसा करते समय हमें दो बातों को ध्यान में रखना होगा। मैं महसूस करता हूं कि जब किसी बात को परिपाटी पर छोड़ दिया जाता है, तो हो सकता है कि कभी-कभी उसका गलत इस्तेमाल किया जाए। भारत जैसे देश में परिपाटी का तरीका अपनाना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि भारत में ऐसा कोई दल नहीं है, जिसकी इस बात में रुचि हो कि संविधान किस प्रकार से चलेगा। यहां ऐसे मंत्री हैं, जिनकी रुचि इस बात में अधिक है कि मंत्रिमंडल में वे अपना स्थान कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। दूसरी ओर, जब इसका कानूनी प्रावधान कर दिया जाता है, तो गवर्नर का कोई स्वविवेक नहीं रहता। भारत जैसे देश में जहां सांप्रदायिक और जातिगत कठिनाइयों के कारण राजनीति में अनिश्चय की स्थिति बनी रहती है, हमें कुछ ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि गवर्नर के पास निर्णय हेतु पर्याप्त स्वविवेक हो। इस संबंध में मेरा यह ठोस सुझाव है कि कार्यपालिका के सामूहिक उत्तरदायित्व के लिए कानून द्वारा प्रावधान किया जाए और शेष सभी बातें गवर्नर के विवेकाधिकार पर छोड़ दी जाएं। इससे दोनों शर्तें पूरी हो जाएंगी। हमें सामूहिक उत्तरदायित्व के प्रावधान के साथ-साथ यह भी व्यवस्था कर देनी चाहिए कि मंत्रिमंडल के संप्रदायों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व मिले और यदि प्रधानमंत्री (मुख्यमंत्री) किसी बाह्य सदस्य को अपने मंत्रिमंडल में शामिल करना आवश्यक समझे तो वह ऐसा कर सके। हमें सामूहिक उत्तरदायित्व के लिए प्रावधान कर देना चाहिए और इसे गवर्नर के स्वविवेक पर नहीं छोड़ना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है, तो शेष बातों को गवर्नर के स्वविवेक पर छोड़ा जा सकता है।

महोदय! अब मैं गवर्नर और उसके मंत्रिमंडल की शक्तियों के विषय पर अपने विचार व्यक्त करूंगा। हम जानते हैं कि गवर्नर और मंत्री के संबंधों को धारा 52, उप-धारा 3 में परिभाषित कर दिया गया है। इस धारा के अनुसार सभी अंतरित मामलों में (अब सभी मामले हस्तांतरित किए जा रहे हैं और कोई भी मामला आरक्षित नहीं रहेगा) गवर्नर अपने मंत्रियों की सलाह पर कार्य करेगा और इसमें एक और उपबंध यह है कि यदि उसे अपने मंत्रियों की सलाह से असहमत होने का कोई पर्याप्त कारण दिखाई देता है, तो वह उस सलाह से अन्यथा कार्य कर सकता है। इस धारा के बनाने वालों के प्रति पूरे आदर के साथ मैं यह कहना चाहता हूं कि चाहे उन्होंने यह धारा सदाशयता से