3. उप-समिति संख्या 2 (प्रांतीय संविधान) - Page 40

उप-समिति संख्या 2

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चाहिए। गवर्नर को पुनः विचार के लिए विधेयक को सदन में वापस भेजने का अधिकार है। यह बड़ा उपयोगी अधिकार है, जो विभिन्न डोमीनियनों के संविधान में विद्यमान है और मेरे विचार से इसे बनाए रखा जाए। गवर्नर किसी विधेयक को गवर्नर-जनरल के विचारार्थ सुरक्षित रख सकता है और जिन मामलों में भी वह विधेयक उसके विचारार्थ रख सकता है, उन्हें कानूनी रूप से परिभाषित कर दिया गया है। जब हम प्रांतीय सरकारों के केंद्र सरकार के साथ संबंधों की चर्चा करेंगे, तब इस विषय पर विचार किया जा सकता है। किंतु इस समय इस विषय पर मैं यह कहना चाहता हूं कि प्रांतीय संविधान ऐसा हो कि प्रांतों को हस्तांतरित किए गए विषयों के संबंध में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बिना वह स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके। संविधान ऐसा हो कि प्रशासन में अथवा कानून बनाने में केंद्र सरकार के निरंतर हस्तक्षेप का कोई अवसर न आए।

कानून और व्यवस्था एवं अल्पसंख्यकों के सुरक्षापायों के प्रश्न के बारे में मैं कह चुका हूं कि इस विषय को हस्तांतरित कर दिया जाए। इस संबंध में मेरा सुझाव है कि आपात स्थिति के दौरान जब कानून और व्यवस्था खतरे में हो तो गवर्नर को पुलिस अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण के संबंध में मंत्रिमंडल की सलाह से अन्यथा अंतिम आदेश देने का अधिकार होना चाहिए। मेरे विचार से यह बहुत जरूरी है।

माननीय कावसजी जहांगीरः केवल आपात स्थिति के दौरान?

डॉ. अम्बेडकरः हां, किंतु दूसरे मामलों में नहीं।

श्री पालः क्या सामान्य काल में नहीं?

डॉ. अम्बेडकरः सामान्य काल में नहीं, जब कोई दंगा होता है, ऐसी आपात स्थिति में गवर्नर जैसा निष्पक्ष अधिकारी, मंत्रिमंडल में क्या हो रहा है उससे विचलित हुए बिना, यह सुनिश्चित कर सकता है कि दंगे के दौरान किसी संप्रदाय विशेष की सुविधा के लिए लोगों का एक स्थान से दूसरे पर स्थानांतरण न किया जाए। मेरे विचार से इससे गवर्नर को कानून और व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बनाने के लिए पर्याप्त अधिकार मिल जाएंगे।

अल्पसंख्यकों के संबंध में कुछ वक्ताओं का सुझाव था कि द्वितीय सदन से अल्पसंख्यकों को संरक्षण मिल सकेगा और मेरे मित्र श्री वुड ने कहा है कि द्वितीय सदन के संदर्भ में दलित वर्गों की स्थिति पर मैंने पूरी तरह विचार नहीं किया है, मैं इस संबंध में अपने मित्र को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैंने इस विषय पर गंभीरता से विचार किया है और मैं अपने मित्र श्री पाल से पूर्णतया सहमत हूं कि द्वितीय सदन अल्पसंख्यक को संरक्षण प्रदान करने के स्थान पर उनके लिए अवरोधक सिद्ध होगा।

गवर्नर और उसके मंत्रिमंडल के बीच संबंध के विषय पर मैंने अभी तक अपने विचार व्यक्त नहीं किए हैं। संक्षेप में, मैं यह कहना चाहूंगा कि क्या गवर्नर को मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करने का अधिकार होना चाहिए अथवा नहीं? देश में मंत्रिमंडल