24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
द्वारा सम्राट की अनुपस्थिति में अपनी बैठकें करने की पद्धति को अपनाने से प्रश्न उठता है कि मंत्रिमंडल अपने निष्कर्षों और निर्णयों की सूचना गवर्नर को किस तरह से दे? यदि इस बात का विचाराधीन विषय से कोई संबंध नहीं है, तो उसकी चर्चा पर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
अध्यक्षः हमने सामान्यतया समूचे प्रश्न पर चर्चा की है, इसलिए यदि आप इस पर अपनी बात जारी रखना चाहते हैं, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
डॉ. अम्बेडकरः इस संबंध में मैं एक बात कहना चाहता हूं। साइमन कमीशन का सुझाव था कि आई.सी.एस. अधिकारी के स्तर का एक मंत्रिमंडल सचिव नियुक्त किया जाए, जो गवर्नर के लिए मंत्रिमंडल के संपर्क अधिकारी के रूप मे कार्य करे। यह सुझाव देते हुए कमीशन ने कहा था कि इस देश में इस तरह का प्रचलन है, अर्थात् मंत्रिमंडल का हमेशा एक सचिव होता है। मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि यह कहना एक बात है कि मंत्रिमंडल का एक सचिव होना चाहिए, किंतु यह कहना बिल्कुल भिन्न बात है कि इस सचिव की मंत्रियों के ऊपर गवर्नर तक पहुंच होनी चाहिए। इस देश में शायद सचिव नियुक्त करने की प्रथा है। मेरे विचार से कोई भी मंत्रिमंडल अथवा प्रधानमंत्री यह नहीं चाहेगा कि सचिव की मंत्रियों अथवा प्रधानमंत्री के ऊपर सम्राट तक पहुंच होः इसे सहन नहीं किया जाएगा। हमें विदित है कि इस देश में मंत्रिमंडल के इतिहास में आरंभ से लेकर अब तक इस बात पर जोर दिया जाता रहा है कि मंत्रियों जैसे लोगों की सम्राट के समीप पहुंच हो सकती है और हम जानते हैं कि यह बात यहां तक चली गई है कि सदन में साम्राज्ञी से भेंट योग्य महिलाएं भी प्रधानमंत्री और उसके मंत्रिमंडल द्वारा नामांकित की जाती हैं। अतः जो सुझाव दिया गया है, वह संभव प्रतीत नहीं होता है। सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के आधार पर कार्य करने वाला कोई भी मंत्रिमंडल इस बात के लिए राजी नहीं होगा कि सचिव को इस तरह से संबद्ध किया जाए।
दूसरी ओर, यदि गवर्नर को मंत्रिमंडल की नीतिगत विषयों पर चर्चा के लिए बैठकों की अध्यक्षता का अधिकार दिया जाता है, तो वह भी व्यावहारिक नहीं लगता, क्योंकि चाहे मंत्रिमंडल को गवर्नर को अपने निर्णयों से अवगत कराना अनिवार्य होगा, किंतु मंत्रिमंडल उसे उन कारणों को नहीं बताएगा, जिनके आधार पर उसने वे निर्णय लिए होंगे। ऐसे निर्णय विशिष्ट अथवा नाजुक हो सकते हैं ओर मंत्रिमंडल गवर्नर को कभी नहीं बताना चाहेगा कि किसी निर्णय विशेष के कारण क्या हैं? इसका कारण यह है कि गवर्नर को मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने के अनन्य अधिकार प्राप्त हैं और हो सकता है कि वह मंत्रिमंडल की सदन को भंग करने की सलाह से सहमत न हो, चूंकि इसका प्रावधान संविधान में कर दिया गया है, इस मामले को अनुदेशों पर छोड़ दिया जाए, जिसका अर्थ यह है कि यदि गवर्नर चाहे तो वह बैठकों की अध्यक्षता कर सकता है, किंतु इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए। दूसरी ओर, मंत्रिमंडल के लिए अपनी