26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रतिकूल होगी। मैं वास्तव में स्थिति को समझ नहीं सका हूं। जो सज्जन इसे जिम्मेदारी के सिद्धांत के प्रतिकूल मान रहे हैं, वे नामांकित सदस्यों के वोट लेने को तो तैयार हैं। मैं इस प्रतिवेदन को उसके वर्तमान रूप में ले रहा हूं। मैं नहीं जानता कि भविष्य में क्या संशोधन किए जाएंगे। यदि प्रतिवेदन को वर्तमान रूप में स्वीकृत कर लिया जाता है कि विधान परिषद में कतिपय सदस्यों को नामांकित किया जाएगा, तो क्या ये सज्जन व्यक्ति यह कहना चाहते हैं कि उनके वोट अवैध होंगे? यदि सदन के निर्वाचित भाग से बने मंत्रिमंडल के सदस्य विधान परिषद् के नामांकित सदस्यों के वोटों का वैध इस्तेमाल कर सकते हैं, यदि इन सदस्यों के वोट सरकार की नीति का आधार बन सकते हैं, तो नामांकित सदस्य मंत्रिमंडल का सदस्य क्यों नहीं हो सकता? मुझे यह बात बिल्कुल समझ नहीं आई। यदि उनके वोटों से लाभ उठाया जा सकता है, तो उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने पर क्या आपत्ति है? इसलिए, नोबल मारक्विस की बात बिल्कुल तर्कसंगत है। अतः हमें या तो नोबल मारक्विस द्वारा पेश किए गए संशोधन में की गई व्यवस्था को स्वीकार करना होगा अथवा हमें दूसरे प्रस्ताव को स्वीकार करना होगा, जिसके बारे में मेरे मित्र कह रहे हैं कि वे उसे बाद में प्रस्तुत करेंगे कि विधान परिषद में किसी प्रकार के प्रतिनिधित्व का तत्व शामिल न किया जाए। मेरा निजी विचार यह है कि विधान परिषद को एक निर्वाचित निकाय बनाया जाए, जिसमें किसी तरह का नामांकन न हो। इस दृष्टि से मैं नोबल मारक्विस के संशोधन का अधिक समर्थक नहीं हूं। यदि इस समिति अथवा बाद में किसी समय नामांकन की व्यवस्था की जाती है, तो मुझे नोबल मारक्विस के साथ सहमत होना पड़ेगा और उनके संशोधन को स्वीकार करना पड़ेगा।
दीवान बहादुर रामचंद्र रावः मैंने अभी, जो भाषण सुना है, उस पर मुझे आश्चर्य हुआ है।
डॉ. अम्बेडकरः आप आश्चर्य कर सकते हैं, किंतु आप दोनों तरह से लाभ नहीं उठा सकते।
दीवान बहादुर रामचंद्र रावः वह अच्छी तरह जानते हैं कि वर्तमान पद्धति के अंतर्गत नामांकित सदस्य मंत्री नियुक्त नहीं किए जा सकते। धारा 52 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी मंत्री छह महीने से अधिक अवधि के लिए पद पर नहीं रह सकता, जब तक वह स्थानीय विधान-मंडल के लिए निर्वाचित नहीं हो जाता।
डॉ. अम्बेडकरः यह संक्रमण काल है।
* * * *