3. उप-समिति संख्या 2 (प्रांतीय संविधान) - Page 45

28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अध्यक्षः मैं इस मुद्दे पर आपका निर्णय जानना चाहूंगा।

राजा नरेन्द्र नाथः मैं माननीय ए.पी. पात्रो की बात का समर्थन करता हूं। मेरे विचार से नामांकन का अधिकार केवल उन्हीं हितों तक सीमित रखा जाए, जिन्हें चुनाव से नहीं दिया जा सकता।

डॉ. शफाअत अहमद खांः जी हां।

राजा नरेन्द्र नाथः कुछ प्रांतों में ऐसे समुदाय, जिनसे डॉ. अम्बेडकर संबद्ध हैं, हो सकते हैं, जिनके लिए चुनावों का प्रबंध करना असंभव होगा।

डॉ. अम्बेडकरः जिस संविधान में मेरे समुदाय को मतदान का अधिकार नहीं दिया जाएगा, उससे मेरा कोई संबंध नहीं होगा।

राजा नरेन्द्र नाथः डॉ. अम्बेडकर जिस समुदाय के हैं, यदि उसके लिए निर्वाचन की व्यवस्था करनी है, तो उसे एक भिन्न आधार पर किया जाना पड़ेगा और सीमित आधार पर नामांकन की व्यवस्था की जाए।

अध्यक्षः ऐसा प्रतीत होता है कि उप-समिति के अधिकांश सदस्य खंड (ग) के समर्थक हैं, जैसा कि प्रतिवेदन में दिया गया है।

पूर्ण अधिवेशन की समिति

उप-समित सं. 2 (प्रांतीय संविधान) के

प्रतिवेदन पर टिप्पणियांऽ - 16 दिसंबर, 1930

श्री चिंतामणि ने प्रांतों में द्वितीय सदन की स्थापना का विरोध करते हुए कहा है कि यह महंगी विलासिता होगी और इसका कोई उपयोग नहीं होगा। संयुक्त प्रांत में द्वितीय सदन की मांग ऐसे संप्रदाय के एक छोटे से वर्ग ने की है, जिसे साइमन कमीशन के अनुसार, प्रांतीय विधान-मंडल में पहले ही अत्यधिक प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। इसलिए उन्होंने संयुक्त प्रांत अथवा भारत के किसी अन्य प्रांत में काफी लंबे समय के लिए और किसी भी स्थिति में प्रस्तावित द्वितीय सदन को बिल्कुल अनावश्यक एवं अवांछनीय समझा। डॉ. अम्बेडकर ने कहा है, ‘मैं श्री चिंतामणि के विचार से सहमत हूं।’

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि राउंड टेबिल कांफ्रेंस, पृ. 314