36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के मामले में कोई स्पष्ट और एक समान सिद्धांत अपनाया जाना चाहिए। आखिर, हम अधि-प्रतिनिधित्व देने की बात इसीलिए तो करते हैं कि कोई अल्पसंख्यक वर्ग अन्यों की तुलना में संख्या, बल अथवा सामाजिक हैसियत या शिक्षा के क्षेत्र में कमजोर है, या उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अन्य समुदायों का मुकाबला कर सकें।
सदस्यः बिल्कुल ठीक।
डॉ. अम्बेडकरः किंतु आप किसी व्यक्ति को इस सिद्धांत का लाभ उसकी राजनीतिक हैसियत या ब्रिटिश सरकार के प्रति उसकी वफादारी या उसकी सेवाओं के आधार पर दें, यह मेरी समझ में नहीं आ सकता। हमने ऐसा किया, तो फिर हम ऐसी मुश्किल में फंस जाएंगे, जिससे निकलना कठिन होगा।
अब केंद्रीय विधान-मंडल में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व का मामला लें। यहां भी वही बात है। अगर केंद्रीय विधान-मंडल के सदस्यों का चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है, तो दलित वर्ग विधान-मंडल में अलग प्रतिनिधित्व की मांग करेगा और सीटों की संख्या इस आधार पर तय होगी कि दूसरे अल्पसंख्यक वर्गों को कितनी सीटें दी जाती हैं। लेकिन अगर आपने वयस्क मताधिकार के स्थान पर अन्य कोई तरीका अपनाया, जैसे संपत्ति के आधार पर वोट देने का अधिकार, जिससे कि दलितों के पूरी तरह छूट जाने की आशंका है, तो दलित वर्ग मजबूर होकर केंद्रीय विधान-मंडल में अपने प्रतिनिधित्व के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव की मांग करेगा। यह चुनाव निर्वाचक-मंडलों के माध्यम से होगा, जिसमें प्रांतीय विधान-मंडल, नगरपालिकाओं और जिले की स्थानीय परिषदों के दलित वर्ग के सदस्य होंगे। कुल मिलाकर दलित वर्ग के बारे में मैंने अपनी बात कह दी है। दरअसल, अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व का मामला ही सारे मामले का निचोड़ है। अगर बहुसंख्यक चाहते हैं कि सभी अल्पसंख्यक वर्ग उनका साथ देकर एक ऐसे संविधान का निर्मण करें, जो भारत में जनता द्वारा, जनता के लिए और जनता की सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त कर सके, तो उन्हें अल्पसंख्यकों के मन से हर तरह की आशंका को दूर करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो मैं साफ-साफ बता दूं कि हममें से अधिकतर लोग फिर डोमीनियन स्टेटस के पक्ष में चले जाएंगे।
पांचवी बैठक - 14 जनवरी, 1931
अध्यक्षऽः अभी-अभी जो प्रस्ताव हमारे सामने आए हैं, उन्हें दृष्टिगत रखते हुए इस ड्राफट रिपोर्ट को जो हमारे सामने है, उसे मंजूर करना असंभव हो गया है, क्योंकि इससे तो समग्र स्थिति ही बदल जाती है। यदि आप लोग सहमत हैं, तो मैं इस उप-समिति की बैठक यहीं स्थगित कर देता हूं। साथ ही, मैं यह भी चाहता हूं कि जो लोग इस
ऽप्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 3 (माइनॉरिटीज), पृ. 127-28