4. उप-समिति संख्या 3 (अल्पसंख्यक) - Page 55

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

राजा नरेन्द्र नाथः स्त्री और पुरुष शब्द के बजाए हम क्या नागरिक शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते? यों मैं इस पर जोर नहीं देना चाहता।

अध्यक्षः ‘समानता’ की बात मुख्य है, बाकी चीजें गौण हैं।

राजा नरेन्द्र नाथः ‘स्वतंत्र और समान उपयोग’ ठीक रहेगा।

अध्यक्षः वास्तव में यह मुद्दा तो डॉ. अम्बेडकर ने उठाया था।

राजा नरेन्द्र नाथः डॉ. अम्बेडकर ने ही अपने भाषण में ‘समान’ शब्द का प्रयोग किया था।

माननीय मोहम्मद शफीः ‘स्वतंत्र’ शब्द में सभी चीजें आ जाती हैं।

डॉ. शफाअत अहमद खांः मेरे विचार से इसे यथावत रहने दीजिए।

अध्यक्षः यह इस प्रकार है, ‘हर व्यक्ति को ख्. . ., स्वतंत्र उपयोग का अधिकार।’ आप समान स्वतंत्र उपयोग कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं, क्योंकि ‘समान’ शब्द व्यक्ति से जुड़ा है, जो इन अधिकारों से उपयोग करेगा। एक व्यक्ति, दूसरे से अलग होता है।

राजा नरेन्द्र नाथः मैं अधिकारों की समानता की बात कर रहा हूं_ समान अधिकार।

श्री चिंतामणिः मेरी समझ से ‘समान’ शब्द जोड़ना बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। इससे कोई खास उद्देश्य सिद्ध नहीं होता।

राजा नरेन्द्र नाथः डॉ अम्बेडकर के दस्तावेज में इस शब्द का प्रयोग है।

अध्यक्षः प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों का स्वतंत्र रूप से उपयोग करे, यह तो आप सुनिश्चित कर सकते हैं, लेकिन यदि कोई नागरिक इन अधिकारों का उपयोग समानता के लिहाज से नहीं करता, तो यह उसकी जिममेदारी है, सरकार की नहीं।

राजा नरेन्द्र नाथः बिल्कुल ठीक।

अध्यक्षः स्त्री, पुरुष शब्द हटाए जा सकते हैं।

डॉ. अम्बेडकरः पैराग्राफ के अंत में ‘अधिकारों’ शब्द के बाद ‘बिना किसी भेदभाव के’ शब्द जोड़ देने चाहिएं।

अध्यक्षः इसमें तो लिखा ही है ‘नस्ल, जाति, वर्ण या लिंग का भेद किए बिना।’

डॉ. अम्बेडकरः ‘अस्पृश्यता’ शब्द होना चाहिए। शायद आपने जोड़ा भी है।

अध्यक्षः . . .‘अस्पृश्यता’! नस्ल और जाति शब्द तो हैं ही।

डॉ. मुंजेः मैं समझता हूं, यह ठीक है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं समझता हूं कि स्थिति को और स्पष्ट रूप से रखने के लिए उस शब्द का जुड़ना आवश्यक है।

अध्यक्षः हमें ऐसा कोई दस्तावेज नहीं तैयार करना चाहिए, जिसके शब्दों और वाक्यविन्यासों को पढ़कर जनता हंसे।