4. उप-समिति संख्या 3 (अल्पसंख्यक) - Page 57

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकरऽः इस समिति के समक्ष विभिन्न समुदायों की जो मांगें रखी गई हैं, पैराग्राफ तीन उन सबका सारांश है।

अध्यक्षः हां।

डॉ. अम्बेडकरः मेरा एक सुझाव है। दलितों ने, इस आधार पर कि उनकी स्थिति अन्य अल्पसंख्यक वर्गों से अलग है, अपने हित में जो मांगें रखी हैं, उन्हें भी इसमें जोड़ना चाहिए। जोड़ने से मेरा तात्पर्य यह नहीं है कि इस सम्मेलन ने इन मांगों को स्वीकार कर लिया है। किंतु पूर्णता के लिए उन मांगों को रखा जाए। इन मांगों के संदर्भ में उपयुक्त पैराग्राफ में एक और पैराग्राफ जोड़ दिया जाए, जो इस प्रकार होः ‘दलित वर्ग के लोग चाहते हैं कि अस्पृश्यता को कानून के द्वारा पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए, अधिकारों के स्वतंत्र और निर्बाध उपयोग की गारंटी दी जाए और इसके प्रति किसी भी तरह की लापरवाही या पूर्वाग्रह के खिलाफ उन्हें गवर्नर-जनरल और भारत मंत्री के समक्ष अपील का अधिकार हो।’

अध्यक्षः लेकिन आप मुझसे सहमत होंगे कि तमाम सुझावों के बारे में अभी और भी ब्यौरा जुटाना पड़ेगा। जो भी व्यावहारिक होंगे, उन्हें तो लिया जाएगा।

डॉ. अम्बेडकरः मैं सहमत हूं।

अध्यक्षः कुछ विधायी और कुछ प्रशासनिक।

डॉ. अम्बेडकरः लेकिन इस समिति के समक्ष विभिन्न समुदायों ने अपनी क्या मांगें रखी हैं और दलितों ने अपने हित के लिए इन मांगों के अतिरिक्त क्या-क्या मांगें रखी हैं, पैराग्राफ उनका सारांश तो प्रस्तुत करता ही है, इसे तो जोड़ा ही जा सकता है।

अध्यक्षः लेकिन इसमें है तो ‘बिना किसी भेदभाव के’, इत्यादि।

डॉ. अम्बेडकरः संविधान में यह लिख देना कि किसी भी व्यक्ति के साथ पक्षपात नहीं किया जाएगा और हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के स्वतंत्र निर्वहन का हक होगा, काफी नहीं है। हम जानते हैं कि लोग हमें इन अधिकारों का उपयोग नहीं करने देंगे। यह बात मैं पूरे विश्वास से कर रहा हूं। अधिकारों के बारे में मैं मात्र कागजी गारंटी नहीं चाहता। पूरा समुदाय हमारे खिलाफ उठ खड़ा होगा और हम संविधान प्रदत्त अधिकारों के दसवें हिस्से का भी उपयोग नहीं कर पाएंगे। इसलिए मैं चाहता हूं कि संविधान केवल यही घोषणा न करे कि बाकी समुदाय की तरह दलितों के भी मौलिक अधिकार हैं, बल्कि इस बात की पूरी व्यवस्था की जाए कि दलित इन मौलिक अधिकारों का स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकें।

अध्यक्षः मान लीजिए, यदि कोई विधान-मंडल ऐसा कानून नहीं बनाता है, जो आपके पक्ष में जाए, तो यह संविधान का उल्लंघन हुआ।

डॉ. अम्बेडकरः नहीं, मेरा कहना है कि जो ज्ञापन मैंने आप सबको दिया है, उसमें

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 3 (माइनॉरिटीज), पृ. 133-35