उप-समिति संख्या 3
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श्री चिंतामणिः ‘बशर्ते कि निर्वाचन वयस्क मताधिकार के सिद्धांत पर हो।’ क्या हम इस वाक्य को निकालने जा रहे हैं?
अध्यक्षः नहीं, जो कुछ कहा गया है, हम उसे बदलने नहीं जा रहे हैं। लेकिन डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि वयस्क मताधिकार की विधि नहीं अपनाई गई, तो दलित अपने लिए पृथक निर्वाचक-मंडल की मांग करेंगे और अगर वयस्क मताधिकार का रास्ता अपनाया जाता है, तो थोड़े समय बाद वे पृथक निर्वाचक-मंडल समाप्त कर देंगे।
पैराग्राफ 12 पर बहस
डॉ. अम्बेडकर ः मैं पैराग्राफ 12 के प्रारंभ में कुछ जोड़ना चाहता हूं। प्रारंभ में जोड़ा जाए, ‘अल्पसंख्यकों और दलित वर्गों की यह स्पष्ट घोषणा है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, वे भारत के किसी भी भावी संविधान को अपनी सहमति नहीं देंगे।’ इसके बाद लिखा जा सकता है, ‘सुझावों के बारे में आम राय’, वगैरह। मैं पहले भी समिति के समक्ष अपने भाषण में कह चुका हूं कि जब तक हमें यह विश्वास नहीं दिलाया जाता है कि भावी संविधान हमारे हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे, हम संविधान पर अपनी सहमति नहीं देंगे। इस मामले में यदि दूसरे समुदाय मेरा साथ नहीं देते तो न दें। मेरे बयान को दलित वर्ग का बयान माना जाए।
अध्यक्षः हां, आपने बयान दिया था और मैं आपके बयान को व्यक्तिगत बयान नहीं, एक प्रतिनिधि का बयान मानता हूं। लेकिन यदि हम आपके वक्तव्य को इस रिपोर्ट में दर्ज कर लेंगे, तो आपमें से ही कुछ लोग कहने लगेंगे कि हमारी मांगें दर्ज नहीं की गईं। फिर भी, यदि आप चाहते हैं कि समिति जो रिपोर्ट सम्मेलन में भेजे उसमें सारी बातें दर्ज रहें, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं। बतौर रिकॉर्ड के इसे दर्ज किया जा सकता है।
लॉर्ड रीडिंग ः मेरी तो समझ में नहीं आ रहा है कि इस पैराग्राफ में इसे जोड़ने की क्या उपयोगिता है? इसका संबंध कार्यपालिका से है। नए संविधान के बारे में, तो इसमें इसके सफल ढंग से काम करने का उल्लेख भर है।
डॉ. अम्बेडकर ः महोदय! मैं बयान देने के लिए बयान नहीं देता और यह भी नहीं चाहता कि उसे मात्र दिखावे के लिए दर्ज कर लिया जाए। जो मांगें मैंने उठाई हैं, कितनी शिद्दत से, कितनी सबल भावनाओं से उठाई हैं। यह सब भी रिपोर्ट में दर्ज होना चाहिए। मैं कोई मांग मात्र उसे स्वीकारने या नकारने के लिए नहीं करता। बाकी चीजों की मंजूरी भी मेरी इस मांग की मंजूरी पर निर्भर है।
लॉर्ड रीडिंगः मेरी समझ में नहीं आता कि इस पैराग्राफ में इसे कैसे जोड़ा जाए?
डॉ. अम्बेडकरः इसे कहीं भी लिया जा सकता है। ऊपर रहता तो ठीक रहता। पर यदि आप सहमत नहीं हैं, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं।