44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अध्यक्ष् ाः इसे यहां नहीं जोड़ा जा सकता। आप इस मामले को फिर उठा सकते हैं। इसे एक नई धारा के रूप में रखना होगा, न कि धारा 12 के संशोधन के रूप में।
डॉ. अम्बेडकरः तीसरी पंक्ति में लिखा है, ‘प्रांतीय कार्यपालिकाओं में हिंदू, मुसलमान, सिख जैसे महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्गों के प्रतिनिधित्व का मामला सबसे महत्वपूर्ण है।’ मेरा सुझाव है कि इसमें से ‘महत्वपूर्ण’ शब्द निकाल दिया जाए, क्योंकि मैं अल्पसंख्यक-अल्पसंख्यक के बीच भेदभाव के पक्ष में नहीं हूं। किसी अल्पसंख्यक वर्ग का उल्लेख उसके नाम से न करें और यदि आप करना ही चाहते हैं, तो फिर सारे अल्पसंख्यक वर्गों का उल्लेख उनके नाम से करें।
डॉ. मुंजेः मैं भी यही बात कहने जा रहा था।
अध्यक्षः ये शब्द इसलिए लिखे गए हैं, क्योंकि ये उस रिपोर्ट में हैं, जिसके संदर्भ में बात हो रही है। लेकिन बताइए, क्या संशोधन करना है। हम इसमें ऐसी कोई चीज दर्ज नहीं करेंगे, जिससे आप सहमत न हों। तो यह इस तरह हुआ - ‘प्रांतीय कार्यपालिका में अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व’।
डॉ. अम्बेडकरः इसे इसी तरह रहने दिया जाए। ‘हिंदू, मुसलमान और सिख’ शब्द निकाल दिए जाएं।
अध्यक्षः आप देखें, इसका अर्थ क्या निकलता है? अब यह इस तरह पढ़ा जाएगा, ‘संविधान के सफलतापूर्वक कार्य करने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात है, प्रांतीय कार्यपालिकाओं में अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व’, वगैरह।
डॉ. अम्बेडकरः ठीक है।
अध्यक्षः इसका मतलब सभी अल्पसंख्यक समुदायों को चाहे उनकी संख्या 8, 9, 10 या 12, कितनी भी हो, कार्यपालिका में प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए।
डॉ. अम्बेडकरः नहीं, तब तो मैं चाहूंगा कि इसमें यह जोड़ दिया जाए, ‘जहां तक संभव हो’ और यह गवर्नर के विशेषाधिकार पर छोड़ दिया जाए। मैं किसी समुदाय का विशेष रूप से उल्लेख करने के खिलाफ हूं।
लॉर्ड रीडिंगः हमें ध्यान से इसे पढ़ना चाहिए और समझना चाहिए कि यह क्या कहता है। शुरुआत होती है, ‘उप-समिति सं. 2 (प्रांतीय संविधान) के सुझावों पर आम सहमति’, इसके बाद आगे की बात जुड़ती है।
डॉ. अम्बेडकरः नहीं, ऐसा नहीं होना चाहिए।
डॉ. मुंजेः मेरा एक छोटा-सा सुझाव है, जो शायद डॉ. अम्बेडकर के विचारों से मेल खाए। इसे इस तरह लिखा जाए, ‘महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक समुदाय जैसे मुसलमान, सिख, दलित वर्ग’।
लॉर्ड रीडिंगः तब तो बाकी को भी शामिल करना पड़ेगा।