46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय मोहम्मद शफीः संघीय का अलग ही दर्जा है।
अध्यक्षः ‘मुसलमान’ शब्द रहना चाहिए।
श्री जोशीः मैं इससे सहमत हूं।
डॉ. अम्बेडकरः तो ‘मुसलमान’ शब्द के साथ ‘और अन्य महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग’ जोड़ना चाहिए।
अध्यक्षः नहीं, आप ऐसा नहीं कर सकते।
डॉ. अम्बेडकरः यह मैं अपने लिए नहीं कह रहा हूं। मैं दलित वर्ग के प्रतिनिधि की हैसियत से यह मांग कर रहा हूँ।
श्री जोशीः इसे नहीं माना जा सकता। आपने ऐसी कोई मांग नहीं की थी।
डॉ. अम्बेडकरः सवाल यह नहीं है कि मैंने मांग की थी या नहीं।
अध्यक्षः अब हम आगे बढ़ते हैं। अब ग्यारह बजकर दो मिनट हो रहे हैं।
डॉ. मुंजेः मैं चाहूंगा कि ‘सहमत’ शब्द की जगह हम लिख सकते हैं कि ‘उसी आधार पर यह मांग भी उठी थी’, वगैरह।
माननीय मोहम्मद शफीः नहीं, नहीं, सहमति हुई थी और यह वास्तविकता है।
डॉ. मुंजेः ‘संघीय संरचना समिति’ मैं क्या बात हुई थी, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
माननीय मोहम्मद शफीः दस्तावेज इसका गवाह है।
डॉ. मुंजेः लेकिन मैं यहां इससे सहमत नहीं हूं।
माननीय ए.पी. पात्रेः चलिए, अगले पैराग्राफ पर।
अध्यक्षः मुसलमान शब्द जोड़ने की बात हुई थी और उस पर सहमति भी हुई थी। बैठक की कार्यवाही के विवरण में यह दर्ज है।
श्री जोशीः क्या इस समिति के रिकॉर्ड में?
लेफटी. कर्नल गिडनेः इससे पहले पूर्ण अधिवेशन में मैंने इस बारे में अलग से एक बयान दिया था। मैंने कहा था कि बड़े समुदाय अपने लिए जो मांग कर रहे हैं, वह ठीक है। लेकिन अल्पसंख्यकों को भी प्रतिनिधित्व चाहिए।
अध्यक्षः वह तो है।
लेफटी. कर्नल गिडनेः यह तो महज एक विकल्प है।
अध्यक्षः नहीं, ऐसा नहीं है। यह वाक्य एक विकल्प सुझाता है, लेकिन यह भी स्पष्ट करता है कि यह मांग उठी थी कि अल्पसंख्यकों को या तो प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व दिया जाए और यदि ऐसा संभव न हो तो ख्. . .,
लेफटी. कर्नल गिडनेः हम मात्र इतना ही चाहते हैं।
राव बहादुर पन्नीर सैलवमः ‘ऐसा न होने पर’ की जगह ‘अगर ऐसा करना असंभव