उप-समिति संख्या 3
हो तो’ लिखना चाहिए।
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अध्यक्षः हां, ‘ऐसा न होने पर’ के स्थान पर ‘यदि ऐसा असंभव हो तो’ का उपयोग नहीं किए जा सकने का कोई कारण नहीं है।
लॉर्ड रीडिंगः फर्क क्या पड़ता है? हम लोग इस वाक्य के बदले उस वाक्य के लिखने पर बेकार समय गंवा रहे हैं।
सरदार उज्ज्वल सिंहः ‘महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्गों’ शब्दों को रहने दीजिए। हम अन्य समुदायों के लिए भी कुछ व्यवस्था कर सकते हैं। कोई न कोई व्यवस्था तो होनी ही चाहिए।
अध्यक्षः कृपया परिस्थितियों की गंभीरता तो समझिए। यथार्थवादी रुख अपनाएं। आप संघीय कार्यपालिका में सभी अल्पसंख्यक वर्गों को प्रतिनिधित्व नहीं दे सकते।
डॉ. अम्बेडकरः मैं अपनी बात साफ करना चाहता हूं। हमने प्रांतीय संविधान में गवर्नर पर यह उत्तरदायित्व सौंपा है कि वह अधिक से अधिक अल्पसंख्यक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास करें। हमने उन्हें किसी सीमा में बांध नहीं रखा है। गवर्नर को इतनी स्वतंत्रता अवश्य होनी चाहिए कि वह अन्य महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्गों में से भी प्रतिनिधियों का चयन कर सके, इसलिए ‘मुसलमानों’ शब्द के बाद ‘अन्य महत्त्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग’ आना चाहिए।
अध्यक्षः नहीं, इस मुद्दे पर बात हो चुकी है। अब हम अगले मुद्दे पर चर्चा करें।
माननीय ए.पी. पात्रेः क्या मैं पैराग्राफ 13 का उल्लेख कर सकता हूं?
डॉ. अम्बेडकरः मेरा अनुरोध है कि पैराग्राफ 12 के बारे में मेरा विरोध दर्ज कर लिया जाए।
सरदार उज्ज्वल सिंहः ‘मुसलमानों’ शब्द के बाद ‘अन्य महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग’ जुड़ना चाहिए।
लेफटी. कर्नल गिडनेः फिर शेष अल्पसंख्यकों को क्यों नहीं?
अध्यक्षः आप लोग कृपया मेरी बात सुनें। मैं पहले ही कह चुका हूं कि हम अन्य अल्पसंख्यक वर्गों को छोड़ नहीं रहे हैं। मैं शब्दों में संशोधन के लिए तैयार हूं। पर आप लोग कृपया निरर्थक मुद्दे न उठाएं। यह तो मान ही लिया गया है कि दूसरे अल्पसंख्यक वर्गों को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और अगर ऐसा करना असंभव हो, तो उनके हितों की रक्षा के लिए एक मंत्री नियुक्त किया जाए। इसमें तो सारी बात आ जाती है। पैराग्राफ 12 पर सहमति हुई, यह मान लिया जाए।
डॉ. अम्बेडकरः मैं समझता हूं कि हमारी आपत्ति दर्ज होनी चाहिए।
अध्यक्षः ठीक है।
¹उप-समिति संख्या 3 (अल्पसंख्यक) द्वारा संशोधन के बाद स्वीकृत पैराग्राफ 12ह्