परिशिष्ट I
स्वाधीन भारत के भावी संविधान में दलित वर्गों की सुरक्षा के
लिए कुछ राजनीतिक उपाय
उप-समिति संख्या 3 (अल्पसंख्यक) की
रिपोर्ट का परिशिष्टऽ
(डॉ. अम्बेडकर और राव बहादुर आर. श्रीनिवासन द्वारा प्रस्तुत)
स्वाधीन भारत में बहुसंख्यक शासन को स्वीकार करने के लिए दलित वर्गों ने जो शर्तें रखी हैं, वे निम्नलिखित हैंः
शर्त 1
समान नागरिकता
दलित वर्ग के लोग अपनी वर्तमान आनुवांशिक गुलामी की दशा में बहुसंख्यक शासन को अपनी सहमति नहीं देंगे। बहुसंख्यक शासन लागू होने से पहले दलितों को अस्पृश्यता की कुरीति से पूरी तरह मुक्ति मिलनी चाहिए। इस मामले को बहुसंख्यकों की इच्छा पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। दलितों को अन्य नागरिकों की तरह सभी अधिकार मिलने चाहिएं।
(क) अस्पृश्यता को समाप्त करने और समान नागरिकता का अधिकार बहाल करने
के लिए निम्नलिखित मौलिक अधिकार को संविधान में दर्ज किया जाए।
मौलिक अधिकार
‘भारत के सभी नागरिक कानून की निगाह में एक समान हैं और सबके नागरिक अधिकार
¹संयुक्त राज्य अमरीका संविधान संशोधन 14 और आयरलैंड सरकार अधिनियम, 1920, 10 व 11, जी.ई. ओ. 5, अध्याय 67, धारा 5(2)ह्
बराबर हैं। वर्तमान समय में अस्पृश्यता के बारे में लागू कोई भी अधिनियम, कानून, आदेश, व्याख्या, या रिवाज, जो किसी व्यक्ति को दंडित करता है, असुविधा पहुंचाता है, अयोग्य करार देता है, या पक्षपात करता है, तो उसे नए संविधान के लागू होते ही समाप्त माना जाएगा।’
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 3 (माइनॉरिटीज), पृ. 168-76