उप-समिति संख्या 3
51
(ख) भारत सरकार अधिनियम, 1919 की धारा 110 और 111 के तहत अधिशासी
¹ऐसा सभी संविधानों में है, देखें प्रो. कीथ की टिप्पणी, कमांड पेपर 207, पृ. 56ह्
अधिकारियों को मिलने वाली छूट को समाप्त करना और उन्हें ठीक उसी तरह की जिम्मेदारी सौंपना, जैसी कि ब्रिटेन और यूरोप में है।
शर्त 2
समान अधिकारों का स्वतंत्र उपयोग
दलितों के समान अधिकारों की घोषणा करना ही काफी नहीं है। यह असंदिग्ध है कि दलितों को समाज की रूढि़वादी ताकतें समान नागरिकता के अधिकार का उपयोग नहीं करने देंगी। कई तरह की बाधाएं खड़ी करेंगी। अतएव, दलितों का मानना है कि ये अधिकार महज कागजी नहीं हैं, तो अधिकारों का हनन करने वालों को दंड देने की व्यवस्था की जाए।
(क) इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए दलित चाहते हैं कि भारत सरकार अधिनियम,
1919 भाग 11 जो अपराध, प्रक्रिया एवं दंड परिभाषित करता है, उसके साथ
निम्नांकित धारा जोड़ दी जाए।
( i ) नागरिकता हनन का अपराध
यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को, सार्वजनिक वास, लाभ, सुविधा, धर्मशाला में (अमरीकी कानून नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 9, अप्रैल, 1866 और 1 मार्च, ठहरने के अधिकार, शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश, सड़क, राह, गली, तालाब, कुआं व पानी के उपयोग के अन्य स्थान, सार्वजनिक वाहन, भूमि, हवा अथवा पानी, नाट्य-गृहों अथवा 1875। ये कानून नीग्रो लोगों को कला व रंग क्रम से जुड़े अन्य सार्वजनिक स्थलों के उपयोग दासता से मुक्ति के बाद उनके से रोकता है, तो उसे अस्पृश्यता के बारे में पहले से चली आ अधिकारों के संरक्षण के लिए रही शर्तों पर विचार किए बिना पांच वर्ष तक के कारावास बनाए गए थे।) की सजा अथवा दोनों दी जाएंगी।
(ख) दलित वर्गों के लोग अपने अधिकारों का स्वतंत्र उपयोग कर सकें, इस मार्ग
में रूढि़वादियों की रुकावटें ही दलितों की परेशानी का कारण नहीं हैं। दलितों
को सबसे बड़ा खतरा सामाजिक बहिष्कार से है। रूढि़वादियों के पास सबसे
खतरनाक हथियार यही है, जिसके बल पर वे दलितों को वह सब कुछ करने
से रोकते हैं, जो इन रूढि़वादियों को पसंद नहीं है। बहिष्कार का हथियार
कब और कैसे इस्तेमाल किया जाता है, इसका पूरा ब्यौरा उस समिति की
रिपोर्ट में है, जिसे 1928 में बंबई सरकार ने गठित किया था। इस समिति
का काम बंबई प्रेसिडेंसी के दलित वर्गों (अस्पृश्यों) और आदिवासियों की
आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक स्थिति का पता लगाना और उनके उत्थान
के उपाय सुझाना था। रिपोर्ट का संक्षिप्त सारांशः
दलित वर्ग और सामाजिक बहिष्कार