54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कराता हो या बांटता हो, अथवा
(ग) किसी और तरीके से बहिष्कार करने के लिए उकसाता हो, प्रोत्साहित करता हो
तो उसे पांच वर्ष की कैद अथवा जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
स्पष्टीकरणः इस धारा के तहत, अपराध हुआ है, यह मानने के लिए प्रभावित व्यक्ति का नाम या वर्ग इंगित होना जरूरी नहीं है। यदि व्यक्ति या वर्ग प्रभावित हुआ है या प्रभावित हो सकता है, तो माना जाएगा कि अपराध हुआ है।
IV. बहिष्कार की धमकी के लिए दंड
कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के ऐसे काम पर, जिसे वह कानूनन कर सकता है अथवा ऐसे काम न करने पर, जिसे कानूनन उसे नहीं करना चाहिए अथवा किसी व्यक्ति से ऐसा काम करवाए, जो कानूनन उसे नहीं करना चाहिए या ऐसा काम न करने पर मजबूर करें, जिसे वह करने का हकदार है, उस व्यक्ति या उससे संबद्ध और किसी व्यक्ति के बहिष्कार की धमकी देता है, तो उसे पांच वर्ष के कारावास अथवा जुर्माना या दोनों का दंड मिलेगा।
अपवादः निम्नांकित कार्य बहिष्कार नहीं माने जाएंगे-
(1) श्रमिक विवादों के मामले में,
(2) सामान्य व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में।
शर्त 3
भेदभाव के खिलाफ संरक्षण
दलित वर्गों को आशंका है कि भविष्य में जो भी कानून बनाए जाएंगे या सरकारी आदेश जारी होंगे, उनमें दलितों के प्रति भेदभाव बरता जा सकता है। अतः कानूनी रूप से ऐसे उपाय किए जाएं, ताकि विधान-मंडलों या कार्यपालिकाओं के लिए भेदभाव वाले कानून बनाना असंभव हो जाए और जब तक यह सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, दलित वर्ग के लोग भविष्य में बहुसंख्यकों के शासन को अपनी सहमति नहीं देंगेः
संविधान में निम्नांकित चीजें दर्ज होनी चाहिएं -
(1) संविदा का अधिकार और उसके अनुपालन का अधिकार, मुकदमा दायर
करने, पक्ष बनने, साक्ष्य देने, उत्तराधिकार पाने, खरीदने, पट्टठ्ठे पर देने, बेचने,
रखने और निजी संपत्ति का अधिकार।
(2) नागरिक और सैनिक सेवाओं और शिक्षण संस्थाओं में भर्ती का अधिकार।
सरकार विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए शर्तें या प्रतिबंध लगा
सकती है।
(3) आवास, सार्वजनिक सुविधाओं, शिक्षण संस्थाओं, धर्मशालाओं, नदियों, झरनों,
कुओं, तालाबों, सड़कों, गलियों, रास्तों, सार्वजनिक वाहनों, विमान सेवाओं,
नौवहन, थिएटर व आम सार्वजनिक स्थलों का अन्य नागरिकों की भांति