56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(1) भारत में तथा उसके सभी प्रांतों में सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए लोक
सेवा आयोग का गठन किया जाए।
(2) लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल विधान-मंडल में प्रस्ताव पास
करके ही हटाया जा सकेगा और उसके सेवा-निवृत्त होने के बाद उसे किसी
सरकारी पद पर नहीं रखा जाएगा।
(3) लोक सेवा आयोग का यह कर्त्तव्य होगा कि वह व्यक्ति की क्षमता को
परखते हुए-
(क) लोगों की भर्ती इस तरह कर, ताकि सभी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व मिले, और
(ख) प्रतिनिधित्व घटने-बढ़ने पर वह देखें कि किस समुदाय को प्राथमिकता देनी चाहिए।
शर्त 6
पक्षपात अथवा हितों की अनदेखी का निराकरण
दलित जानते हैं कि आजादी के बाद सत्ता बहुसंख्यक रूढि़वादियों के हाथ में ही होगी। दलितों को आशंका है कि ये बहुसंख्यक उनके साथ न्याय नहीं करेंगे। इस तथ्य पर भी ध्यान देना चाहिए कि दलितों को चाहे जितना प्रतिनिधित्व दे दिया जाए, वे सभी विधान-मंडलों में अल्पसंख्या में ही रहेंगे। दलित चाहते हैं कि संविधान में ऐसी व्यवस्था की जाए, ताकि उनके साथ पक्षपात या उनके हितों की अनदेखी न होने पाए। इसके लिए भारत के संविधान में निम्नांकित चीजें दर्ज की जाएं-
(1) भारत और उसके सभी प्रांतों के विधान-मंडलों, कार्यपालिकाओं और कानूनी
मान्यता प्राप्त अन्य संस्थाओं की यह जिम्मेदारी होगी कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य-सफाई,
नौकरियों में भर्ती व दलितों के राजनीतिक व सामाजिक उत्थान से संबद्ध अन्य
मामलों में दलितों की भेदभाव रहित भागीदारी के लिए प्रावधान बनाएं।
(ब्रिटिश उत्तरी अमरीका अधिनियम, 1867, धारा 93)
(2) भारत में या उसके किसी प्रांत में जहां कहीं भी इस धारा का उल्लंघन
होगा, दलितों को संबद्ध प्रांतीय अधिकारी या अधिकारियों के खिलाफ गवर्नर
जनरल-इन-काउंसिल के यहां अपील करने का अधिकार होगा और यदि कोई
केंद्रीय अधिकारी या प्राधिकरण इसका उल्लंघन करता है, तो भारत मंत्री के
यहां अपील करने का अधिकार होगा।
(3) इस तरह के किसी भी मामले मेंयदि गवर्नर जनरल या भारत मंत्री को महसूस
होता है कि प्रांतीय या केंद्रीय अधिकारियों, प्राधिकरणों ने इस धारा को ठीक
से लागू करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए हैं, तो गवर्नर जनरल या भारत
मंत्री खुद इस मामले में कोई आदेश जारी कर सकते हैं। इसके खिलाफ अपील
सुनने वाला प्राधिकारी इस आदेश को मानने के लिए बाध्य होगा।