4. उप-समिति संख्या 3 (अल्पसंख्यक) - Page 76

उप-समिति संख्या 3

सरकार पर अपना प्रभाव डालने के लिए जितना जरूरी यह है, उतना ही आवश्यक है नीति निर्धारण में उनकी हिस्सेदारी। यह तभी संभव है, जब किसी दलित को मंत्रिमंडल में स्थान मिले। दलितों की मांग है कि अन्य अल्पसंख्यकों की तरह दलितों का भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व होना चाहिए। यह दलितों का नैतिक अधिकार है। दलितों का प्रस्ताव है कि गवर्नर या गवर्नर जनरल मंत्रिमंडल में दलितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें। यह उनकी जिम्मेदारी होगी।

परिशिष्ट II

उप-समिति संख्या 3 (अल्पसंख्यक) की रिपोर्ट

ये दलित वर्गों के हितों से संबंधित रिपोर्ट के कुछ पैराग्राफ हैं, जो पूर्ण

सम्मेलन की समिति द्वारा 19 जनवरी, 1931 को अनुमोदित किए गए हैं

  1. उप-समिति के समक्ष रखे गए मुख्य प्रस्तावों में से एक यह था कि संविधान में मूल अधिकारों की घोषणा शामिल की जाए, जिसके अनुसार विभिन्न समुदायों के सांस्कृतिक तथा धार्मिक जीवन को संरक्षण प्रदान किया जा सके और प्रत्येक व्यक्ति को बिना प्रजाति, जाति, धर्म या लिंग के भेदभाव के आर्थिक, सामाजिक तथा नागरिक अधिकार दिलाए जाएं (डॉ. अम्बेडकर ने संविधान में मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए संवैधानिक व्यवस्थाओं को शामिल करने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनमें उनके उल्लंघन किए जाने पर निवारण का अधिकार भी शामिल हो)।

  2. हालांकि यह सामान्य रूप से स्वीकार कर लिया गया था कि संयुक्त स्वतंत्र निर्वाचक-मंडल की प्रणाली लोकतांत्रिक सिद्धांतों के सर्वथा अनुकूल है, जैसा कि आम तौर पर समझा जाता है और कुछ ही दिनों की संक्रमण अवधि के बाद वह दलित वर्गों को स्वीकार्य होगी, बशर्ते कि मताधिकार वयस्क मताधिकार पर आधारित हों। किंतु यह भी विचार व्यक्त किया गया कि भारत में समुदायों के वितरण और उनके आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक प्रभाव के असमान होने के कारण इस बात का खतरा है कि ऐसी प्रणाली के अंतर्गत अल्पसंख्यकों को, जो प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, वह सर्वथा अपर्याप्त होगा और ऐसी प्रणाली सामुदायिक सुरक्षा नहीं दे पाएगी।

  3. अतः विभिन्न समुदायों ने यह मांगें की हैं कि प्रतिनिधित्व और स्थानों के नियत अनुपात का प्रबंध किया जाए। यह भी अनुरोध किया गया कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या किसी जनसंख्या में उसके अनुपात से किसी भी स्थिति में कम नहीं होनी चाहिए। इसे सुनिश्चित करने के मुख्य रूप से तीन तरीके हो सकते थेः (1) नामांकन, (2) संयुक्त निर्वाचक-मंडल जिनमें स्थानों का आरक्षण हो, और (3) पृथक निर्वाचक-मंडल।

  4. चर्चा से यह बात स्पष्ट हो गई कि केवल एक मांग, जिसे आम स्वीकृति प्राप्त